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मध्य प्रदेश में SC-ST विसबल कंपनी बनाने का आदेश निरस्त - MP NEWS

भोपाल
। मध्यप्रदेश में जाति के आधार पर विशेष सशस्त्र बल की कंपनियां बनाने का आदेश गुरुवार देर शाम निरस्त कर दिया गया। दिनांक 7 जून को पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश में कहा गया था कि बालाघाट एवं मंडला क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं के लिए तीन कंपनियों का गठन करना है।

पुलिस मुख्यालय के विवादित आदेश में क्या जानकारी मांगी गई थी

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (योजना शाखा) के सहायक पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने 7 जून को एक आदेश बालाघाट व मंडला के पुलिस अधीक्षक और 35वीं व 36 वीं वाहिनी के सेनानी के नाम आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि शासन द्वारा बालाघाट एवं मंडला जिले में अजा-अजजा और महिलाओं के लिए अलग से तीन कंपनियों की स्थापना करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए जिले की कुल जनसंख्या कितनी है, वहां अजा-अजजा की जनसंख्या का प्रतिशत क्या है, स्वीकृत और उपलब्ध बल कितना है, इनमें से अजा-अजजा वर्ग का बल कितना है आदि की जानकारी भिजवाएं। 

पुलिस मुख्यालय के आदेश पर विवाद के हुआ 

भारतीय संविधान के अनुसार जाति के आधार पर विशेष सशस्त्र बल की कंपनियों का गठन नहीं किया जा सकता और ना ही जाति के आधार पर कंपनियों में किसी भी प्रकार की पोस्टिंग अथवा ट्रांसफर किए जा सकते हैं। यह सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। इसे जाति पर आधारित नहीं किया जा सकता। विवाद की स्थिति बनने के बाद जब स्पष्ट हुआ कि पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश संविधान की अवधारणा के विरुद्ध है तो उसे निरस्त कर दिया गया।

वह तो टाइपिंग मिस्टेक थी: मनोज कुमार सिंह IPS

मनोज कुमार सिंह ने बताया कि क्षेत्र के अजा-अजजा एवं महिलाओं के कल्याण के लिए जानकारी एकत्र की जा रही थी। टाइपिंग की गलती के कारण अलग कंपनी गठित करने का आदेश जारी हो गया था। योजना शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि मंशा संबंधित वर्ग की बेहतरी के लिए कार्य करने को लेकर जानकारी जुटाने की थी। मामला संज्ञान में आने के बाद आदेश को निरस्त कर दिया गया है। उल्लेख करना आवश्यक होगा कि किसी भी सरकारी दस्तावेज पर हस्ताक्षर से पहले उसकी टाइपिंग की मिस्टेक पकड़ना प्राधिकृत अधिकारी की जिम्मेदारी है। एक बार हस्ताक्षर हो जाने के बाद टाइपिस्ट को जिम्मेदार नहीं बताया जा सकता।

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