मध्य प्रदेश विधानसभा में किन महिला विधायकों ने कितने सवाल उठाए, कैसा प्रदर्शन किया, पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 8 मार्च 2026
: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम आपको बता रहे हैं कि पिछले महीने फरवरी 2026 में संपन्न हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में महिला विधायकों का प्रदर्शन कैसा रहा। किन महिला विधायकों ने कितने सवाल उठाए और कौन से सवाल उठाए। उनका अभिनंदन करने से पहले जान लीजिए:- 

श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : सबसे अधिक प्रश्न उठाने वाली महिला विधायक

इन्होंने सबसे अधिक 13 सवाल उठाए, जिनमें मुख्य रूप से बलदेवगढ़ और पलेरा में बीजों के वितरण में अनियमितता। इन्होंने वेंडरों द्वारा फर्जी ब्लॉक के माध्यम से भ्रष्टाचार और दिव्यांग नागरिकों के लिए मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के प्रावधान का मुद्दा उठाया। सिर्फ इतना ही नहीं खरगापुर में मिनी फिल्म सिटी बनाने की मांग की। भू माफियाओं पर FIR, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की फर्जी अंक सूची, और पलेरा में परियोजना अधिकारी की मनमानी पर भी सरकार को घेरा। इसके अलावा, स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति, मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए राशि, मछली पालन योजना में फर्जीवाड़ा, सड़क निर्माण, अवैध दूध शीत केंद्र और वन विभाग द्वारा तालाब निर्माण जैसे गंभीर मुद्दे उठाए।

श्रीमती अनुभा मुंजारे दूसरे नंबर पर

9 प्रश्नों के साथ श्रीमती अनुभा मुंजारे मध्य प्रदेश में दूसरे नंबर की महिला विधायक हैं जिन्होंने विधानसभा में सबसे ज्यादा प्रश्न उठाए। इन्होंने:- 
बालाघाट में ग्राम पंचायत सचिवों के नियमों के विरुद्ध संलग्नीकरण और आयुष विभाग में दवा खरीदी में अनियमितताओं पर तीखे सवाल किए। 
उन्होंने परियोजना अधिकारी द्वारा वित्तीय गबन, आयुष विभाग की सामग्री क्रय में भ्रष्टाचार, सहायक जिला परियोजना समन्वयक की नियुक्ति, और राजस्व विभाग में शिक्षकों की ड्यूटी जैसे मामले उठाए। इसके अलावा, अस्पताल में भोजन व्यवस्था के टेंडर, नर्सिंग कॉलेज में निर्माण कार्य और पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं पर भी विवरण मांगा।

श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी भी दूसरे नंबर पर 

9 प्रश्नों के साथ श्रीमती झूमा सोलंकी भी दूसरे नंबर पर हैं। इन्होंने खरगोन विश्वविद्यालय में नए कोर्स शुरू करने
 और जिले में खेल गतिविधियों के बजट पर सवाल उठाए। उन्होंने भीकनगांव में राजस्व सर्वेक्षण, बड़वानी में आंगनवाड़ी भवनों की स्थिति, और विधायक निधि के कार्यों पर जानकारी मांगी। साथ ही, गांवों के विद्युतीकरण, रोशिया तालाब का काम रुकने, सोयाबीन फसल के मुआवजे और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी
 के मुद्दे भी उठाए।

श्रीमती ललिता यादव भी दूसरे नंबर पर 

श्रीमती ललिता यादव ने भी 9 प्रश्न उठाए इसलिए वह भी दूसरे नंबर पर है। इन्होंने छतरपुर में शैक्षणिक अनियमितताओं और विश्वविद्यालय के स्टेडियम की दुकानों के किराए की वसूली पर सवाल किए। उन्होंने निजी वाहनों के किराए पर व्यय, राशन दुकानों में स्टॉक की कमी, और दुकानों के आवंटन के मापदंडों
 पर सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा, अवैध सोनोग्राफी केंद्रों, झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही, बॉन्ड डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मलेरिया विभाग में नियम विरुद्ध भुगतान जैसे स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे उठाए।

श्रीमती निर्मला सप्रे 

7 प्रश्न के साथ श्रीमती निर्मला सप्रे तीसरे स्थान पर है। इन्होंने बीना के पीजी कॉलेज की प्राचार्य के आचरण, बीना में स्टेडियम निर्माण की घोषणा, और कौशल विकास केंद्र की स्थापना पर सवाल किए। उन्होंने शिक्षकों के बकाया एरियर, अतिथि शिक्षकों की अवकाश व्यवस्था, बीना कन्या महाविद्यालय में विज्ञान संकाय और खिमलासा को तहसील बनाने की मांग पर भी विवरण मांगा। 

सुश्री रामश्री (बहन रामसिया भारती) राजपूत 

इन्होंने कुल 7 प्रश्न उठाने जिसमें छतरपुर में आजीविका मिशन के तहत गणवेश वितरण में भ्रष्टाचार
 और शिक्षकों के अवकाश नगदीकरण में गड़बड़ी पर सवाल उठाए। उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के आदेश, राशन दुकानों के स्टॉक में हेराफेरी, बड़ा मलहरा में महाविद्यालय भवन, जन सेवा मित्रों की बहाली और नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के मुद्दे सदन में रखे। 

श्रीमती प्रियंका पैंची (7 प्रश्न): 

इन्होंने चाचौड़ा क्षेत्र में पुलिस बल की कमी, चाचौड़ा-बीनागंज को नगरपालिका बनाने और क्षेत्र में सड़क व भवन निर्माण की स्थिति पर सवाल किए। उन्होंने सोलर एनर्जी के फिक्स चार्ज, अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा, विधायकों के पत्रों पर कार्यवाही और सिंचाई परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण व मुआवजे
 के गंभीर विषय उठाए।

श्रीमती सेना महेश पटेल (5 प्रश्न): 

इन्होंने अलीराजपुर में मनरेगा और प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत निर्माण कार्यों और रोजगार की तलाश में हो रहे पलायन पर सवाल उठाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग भर्ती में नियमों के उल्लंघन, अतिथि शिक्षकों की समस्याओं और छात्रा रोशनी कलेश की संदिग्ध मृत्यु की सीबीआई जांच की मांग की।

श्रीमती रीति पाठक (5 प्रश्न): 

इन्होंने सीधी में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से गणवेश वितरण, पुराने बस स्टैंड पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण और अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के लिए सुविधाओं पर सवाल किए। उन्होंने सीधी में स्कूलों के उन्नयन और गोपाल दास बांध को पर्यटन स्थल बनाने का मुद्दा भी उठाया।

श्रीमती नैना विक्रम वर्मा (5 प्रश्न): 

इन्होंने धार विधानसभा में नए स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन, हाई स्कूल भवनों के निर्माण, और धार नगर में पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल किए। उन्होंने अस्पताल में अग्नि शमन यंत्रों की कमी और बांध प्रभावितों को भूखंडों की रजिस्ट्री के संबंध में भी सरकार से जानकारी मांगी।

श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे (4 प्रश्न): 

इन्होंने खंडवा माइक्रो सिंचाई योजना में देरी, खंडवा जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर सवाल उठाए।

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक (4 प्रश्न): 

इन्होंने दमोह में सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन, हटा क्षेत्र में जलाशयों के निर्माण और नहरों की मरम्मत, अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी और डेयरी योजनाओं के हितग्राहियों पर सवाल किए।

श्रीमती गंगा सज्जन सिंह उईके (1 प्रश्न): 

इन्होंने घोड़ाडोंगरी क्षेत्र के चोपना में बंगाली शरणार्थियों को भू-अधिकार पत्र (पट्टे) वितरण के संबंध में सवाल उठाया। 

सरकार में शामिल महिला मंत्री जो जवाब दे रही थीं

सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ महिला विधायक मंत्री के रूप में विपक्षी सवालों के जवाब दे रही थीं:
सुश्री निर्मला भूरिया (महिला एवं बाल विकास मंत्री) ने लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण, भुगतान और आंगनवाड़ियों से जुड़े दर्जनों सवालों के विस्तृत जवाब दिए।
श्रीमती संपतिया उईके (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री) ने प्रदेश भर में नल-जल योजनाओं, हैंडपंप खनन और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से संबंधित सवालों के उत्तर दिए।
श्रीमती कृष्णा गौर (पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री) ने पिछड़ा वर्ग की योजनाओं, छात्रावासों, वक्फ संपत्तियों और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े सवालों के जवाब सदन पटल पर रखे।
श्रीमती प्रतिमा बागरी (विमानन राज्य मंत्री): इन्होंने अनूपपुर और अन्य जिलों में हवाई पट्टी निर्माण और हवाई सेवा शुरू करने से संबंधित सवालों के जवाब दिए। 

इन महिला विधायकों ने विशेष मुद्दे उठाए

श्रीमती मनीषा सिंह (जैतपुर/अनूपपुर) ने अनूपपुर जिले के जैतपुर क्षेत्र में केंद्रीय सहायता निधि के तहत निर्माणाधीन आदिवासी कन्या आश्रम/शाला भवन के लिए स्वीकृत राशि और निर्माण कार्य की प्रगति के संबंध में जानकारी मांगी थी। इसके अलावा, इन्होंने बजट अनुदान मांगों पर हुई चर्चा में भी सक्रिय रूप से भाग लिया।

श्रीमती छाया गोविंद मोरे (भीकनगाँव) ने भीकनगाँव-बिजलवाड़ा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के तहत आने वाले 129 गाँवों के किसानों को सिंचाई की सुविधा न मिल पाने का गंभीर मुद्दा उठाया था।
श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर) सदन में बहुत सक्रिय रहीं और इन्होंने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान 'देहदान' करने वाले नागरिकों को 'गार्ड ऑफ ऑनर' देने के सरकार के फैसले की सराहना की। इन्हें विधानसभा की 'सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति' का सभापति भी नियुक्त किया गया है। 

तो देखा आपने किस प्रकार महिलाओं ने मोर्चा संभाल नहीं लिया है बल्कि मोर्चा अपने अधिकार में ले लिया है और पूरा नियंत्रण कर लिया है। वह पुरुष विधायकों के समान सभी मुद्दों पर बात कर रही हैं। सिर्फ अपने क्षेत्र की नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के बड़े मुद्दे उठा रही हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विधानसभा में लगभग 100 पुरुष विधायक निष्क्रिय थे। उन्होंने ना तो अपने क्षेत्र का कोई मुद्दा उठाया और ना ही मध्य प्रदेश स्तर का लेकिन महिला विधायकों में एक भी निष्क्रिय नहीं थी। सभी महिला विधायकों ने कोई ना कोई सवाल जरूर किया। विधानसभा में अपना योगदान दिया है। 
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