भोपाल, 15 जून 2026: मध्य प्रदेश शासन के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए ट्रांसफर पॉलिसी 2026 घोषित कर दी है। इसमें कुछ कठोर नियमों के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है और राहत की मांग की जा रही है परंतु स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि, मध्य प्रदेश शिक्षा के स्थानांतरण नीति 2026 के नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा और इसमें किसी प्रकार की राहत की कोई गुंजाइश नहीं है।
इस बार प्राथमिक शिक्षकों की सीनियरिटी चली जाएगी
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति 2026 के अनुसार यदि कोई प्राथमिक शिक्षक अपने जिले के बाहर स्वैच्छिक ट्रांसफर चाहता है तो आवेदन करने से पहले उसको यह समझ लेना चाहिए कि, उसका ट्रांसफर होते ही उसकी वरिष्ठता शून्य हो जाएगी। मतलब सीनियरिटी चली जाएगी। जिस जिले में वह ट्रांसफर होकर जाएगा, वहां पर सबसे जूनियर मतलब नव नियुक्त प्राथमिक शिक्षक के बराबर दर्जा मिलेगा। यह नियम पहले से ही डिपार्टमेंट में मौजूद है परंतु इसको अप्लाई नहीं किया जाता था। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह और आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय श्री अभिषेक सिंह ने डिसाइड किया है कि इस बार इसको प्रत्येक प्राथमिक शिक्षक के ट्रांसफर पर अप्लाई किया जाएगा। जो नियम प्राथमिक शिक्षकों के लिए जिला स्तर पर है, वही नियम माध्यमिक शिक्षा को के लिए संभाग स्तर पर लागू होता है। केवल उच्च माध्यमिक शिक्षक राज्य में कहीं पर भी स्वैक्षिक ट्रांसफर ले सकते हैं।
अन्य प्रमुख नियम और शर्तें
स्वैच्छिक ट्रांसफर के लिए जनवरी-मार्च 2026 में 90% ई-अटेंडेंस जरूरी। इससे कई शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है।
शून्य नामांकन या अतिरिक्त शिक्षकों वाले स्कूलों से शिक्षकों को कमी वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। सबसे लंबे समय से कार्यरत शिक्षक को अतिशेष माना जाएगा। सत्र के बीच भी काउंसलिंग के जरिए ट्रांसफर संभव।
सेवानिवृत्ति में 1 वर्ष या कम बचा हो तो प्रशासनिक ट्रांसफर से छूट; विधवा, तलाकशुदा, गंभीर बीमारी वाले, महिला कर्मचारियों को गृह जिले में प्राथमिकता।
पति-पत्नी/परिवार के मामले में विशेष परिस्थितियों में सुविधा।
चॉइस फिलिंग की अंतिम तिथि 23 जून तक तय होने के साथ शिक्षकों में सक्रियता बढ़ी है; पोर्टल पर रिक्त पदों की जानकारी 18 जून को अपडेट होने वाली है। शिक्षक संगठनों (जैसे शासकीय शिक्षक संगठन) द्वारा ई-अटेंडेंस शर्त हटाने की मांग जारी है, लेकिन विभाग इसे पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रहा है।

