भोपाल, 15 जून 2026: राजनीति में एक गलत फैसला कई बार बड़ा नुकसान करता है। "मीनाक्षी नटराजन" एक ऐसा मामला है जो जीतू पटवारी को उस समय भी नुकसान पहुंचाएगा जब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2028 के लिए प्रत्याशियों का चयन किया जा रहा होगा। नॉरेटिव अभी से सेट करना शुरू कर दिया गया है। यदि जीतू पटवारी ओवर कॉन्फिडेंट और मिस गाइड नहीं हुए होते, तो कमलनाथ मध्य प्रदेश की तीसरी सीट कांग्रेस को आसानी से दिल देते।
जीतू पटवारी और कमलनाथ की मीडिया टीम में अंतर
इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले, यह समझना भी जरूरी है कि जीतू पटवारी की मीडिया टीम को जीतू पटवारी के वीडियो वायरल करना आता है लेकिन कमलनाथ के पत्रकार साथियों को नॉरेटिव सेट करना आता है। 2018 के विधानसभा के चुनाव से पहले भी उन्होंने एक नॉरेटिव सेट किया और "अबकी बार सिंधिया सरकार" वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया क्लीन बोल्ड हो गए। 2019 में टूटती हुई पार्टी को बचाने में असफल हो जाने के बावजूद 2023 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ एक बार फिर नॉरेटिव के सहारे फ्री हैंड और फुल पावर लेने में सफल हो गए थे। तो कुल मिलाकर बात यह है कि, कमलनाथ को नॉरेटिव सेट करना आता है। जबकि जीतू पटवारी की टीम इस मामले में डबल जीरो है।
कमलनाथ तो NOC सहित डॉक्युमेंट रेडी करके बैठे थे
अब बात करते हैं राज्यसभा चुनाव की, तो कमलनाथ को पूरा भरोसा था की टिकट उनको ही मिलेगा। उन्होंने टिकट के लिए जो कुछ भी किया जाना चाहिए था, वह सब कर लिया था और सामने कोई विकल्प भी नहीं था। उन्होंने स्पष्ट बता दिया था की तीसरी सीट के लिए लड़ाई होगी। दमदार कैंडिडेट जरूरी है नहीं तो भाजपा, तीसरी सीट छीन ली जाएगी। आत्मविश्वास के चलते उन्होंने नामांकन के लिए सभी डॉक्यूमेंट और NOC तक करवा लिए थे।
जीतू पटवारी की कच्ची पॉलिटिक्स: चैलेंज का वैल्यूएशन नहीं कर पाए
वैसे राज्यसभा चुनाव में टिकट के मामले में प्रदेश अध्यक्ष की कोई वैल्यू नहीं होती लेकिन कांग्रेस में जीतू पटवारी की अपनी वैल्यू है और उनका ओपिनियन मायने रखता है। यदि जीतू पटवारी, मिस गाइड नहीं हुए होते, ओवर कॉन्फिडेंट नहीं हुए होते और एक्सरसाइज करके देखते कि चुनाव जीतने के लिए क्या करना पड़ेगा। तो उनको समझ में आ जाता कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द नहीं होता तब भी चुनाव जीतना कितना मुश्किल था। कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने 250 करोड़ वाले बयान देना शुरू कर दिए थे। समझना जरूरी था कि जीतू पटवारी इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करते?
कमलनाथ कैंडिडेट होते तो सीट कांग्रेस के पास होती
अब कमलनाथ, अपने मित्र पत्रकारों के माध्यम से यह नॉरेटिव सेट कर रहे हैं कि यदि उनको कैंडिडेट बनाया गया होता तो मध्य प्रदेश की तीसरी सीट कांग्रेस के पास होती। यह भी कहा जा रहा है कि, यदि कमलनाथ को डमी कैंडिडेट बना दिया गया होता तब भी सीट कांग्रेस के पास रह सकती थी, लेकिन ओवर कॉन्फिडेंस में जीतू पटवारी और उनकी टीम ने कमलनाथ को बूढ़ा और बेकार नेता समझा। यदि इसी तरह के डिसीजन विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय लिए गए, तो पक्का मानिए, मध्य प्रदेश में कितनी भी एंटी इनकम्बेंसी, सरकार तो भाजपा की बनेगी। ✒ उपदेश अवस्थी।

