मंत्री प्रहलाद सिंह जी यह कौन सी वाली पॉलिटिक्स कर रहे हैं? किसके खिलाफ लड़ रहे हैं?

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 27 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश सरकार की सबसे सीनियर कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, अजीब तरह की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। 26 जुलाई को रात 11:00 बजे उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा, जिसमें यह भी लिखा कि, जिन्होंने ये षड्यंत्र रचा है वे नेता हो या अधिकारी उनके विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी। सवाल यह है कि श्री प्रहलाद सिंह जी किसके खिलाफ लड़ रहे हैं और यदि लड़ भी रहे हैं तो ऐसा विपक्ष के छोटे नेताओं जैसा ऐलान क्यों कर रहे हैं? क्या सरकार के सबसे सीनियर कैबिनेट मंत्री को इस तरह का बयान देना चाहिए क्या?

जिन्होंने ये षड्यंत्र रचा है वे नेता हो या अधिकारी उनके विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी

कैबिनेट मंत्री सिर्फ राज सिंह पटेल दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी का प्रचार करने गए थे। यहां लोधी बाहुल्य वाले बसई गांव में प्रचार किया और वापस लौट रहे थे। फिर उन्होंने फेसबुक पर लिखा- आज बसई से लौटते हुए,जेल में निरुद्ध जिला पंचायत सदस्य प्रिय Sarvjeet Singh Lodhi के गाँव कानूनी जाकर भोजन किया। परिवारजनों एवं शुभचिंतकों से मुलाक़ात कर विश्वास दिलाया कि वे संयम रखे, जिन्होंने ये षड्यंत्र रचा है वे नेता हो या अधिकारी उनके विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी। इससे पहले जब सर्वजीत सिंह लोधी को गिरफ्तार किया गया था तब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल को Tag करते हुए उन्होंने लिखा था, “सागर जिले में जिला पंचायत सदस्य एवं लोधी क्षत्रिय महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष प्रिय सर्वजीत सिंह की सागर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है। 2 वर्षों से इस प्रकरण में असमंजस बनाए रखना और फिर गिरफ्तार करना यह सिर्फ अपमानित करने की कोशिश है। मैं ऐसी कार्यवाही की निंदा करता हूं।” 

सर्वजीत सिंह लोधी कौन है

कोई महान लोधी नेता नहीं है। कानोनी (Kanoni / कनोनी) गांव में निवास करने वाले करोड़पति परिवार की संतान है और सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि मात्र 21 साल की उम्र में जिला पंचायत सदस्य का प्रतिष्ठा पूर्ण चुनाव जीत लिया है। प्रतिष्ठापूर्ण इसलिए क्योंकि उनके खिलाफ तत्कालीन परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत के भतीजे को चुनाव में हराया था। श्री सर्वजीत सिंह, लोधी क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। 

मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का क्या कनेक्शन

श्री सर्वजीत सिंह लोधी के ऊपर ₹3000 का इनाम चल रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में उनका फरार बताया जा रहा था। लोगों का कहना है कि कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के प्रेशर के कारण पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर रही थी। कहा तो यह भी जाता है कि, मध्य प्रदेश के प्रत्येक रसूखदार लोधी परिवार को श्री प्रहलाद सिंह पटेल व्यक्तिगत रूप से संरक्षण देते हैं। इसी संरक्षण के कारण पिछोर विधायक श्री प्रीतम सिंह लोधी के पुत्र श्री दिनेश लोधी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है जबकि उनके खिलाफ परमानेंट अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। कैबिनेट मंत्री श्री लाल सिंह पटेल को भारतीय जनता पार्टी में केवल इसलिए महत्व मिलता है क्योंकि वह लोधी समाज के सबसे बड़े नेता हैं। पार्टी ने रणनीति पूर्वक सुश्री उमा भारती के खिलाफ उनको लोधी समाज का नेता स्थापित किया था। अब, जबकि लोधी समाज के कारण ही पार्टी में महत्व मिलता है तो श्री प्रहलाद सिंह जी भी लोधी समाज की ही पॉलिटिक्स करते हैं। बस यही कनेक्शन है। 

सरबजीत सिंह का मामला क्या है, पुलिस ने गिरफ्तार क्यों किया

यह मामला जुलाई 2024 (लगभग 23 जुलाई 2024) का है। बांदरी थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-44 पर स्थित सौरभ ढाबा पर हुआ विवाद था। शुरुआत में ढाबे पर सर्वजीत सिंह के ड्राइवर (सौरभ सूर्यवंशी) और कुछ स्थानीय युवकों के बीच छोटी सी बातचीत (कूड़ेदान में थूकने या इसी तरह के विवाद) से झगड़ा शुरू हुआ।

सर्वजीत सिंह के ड्राइवर ने एक युवक पर कांच की बोतल से हमला किया। इसके बाद सर्वजीत सिंह लोधी और उनके साथी वहां पहुंचे। उन्होंने ढाबे पर तोड़फोड़ की, वाहनों को नुकसान पहुंचाया, हवाई फायरिंग की और दहशत फैलाई। वहां मौजूद ASI देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव से भी मारपीट का आरोप है और उन पर फायरिंग करने का आरोप लगाया गया।

पूरा वाकया ढाबे के CCTV में कैद हुआ था और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। ढाबे के मालिक सौरभ साहू की शिकायत पर बांदरी थाना पुलिस ने FIR दर्ज की। आरोपों में दंगा, तोड़फोड़, पुलिस अधिकारी पर हमला, हवाई फायरिंग और हत्या के प्रयास जैसी धाराएं शामिल हैं। मतलब पुलिस रिकॉर्ड के हिसाब से मामला काफी गंभीर है।

पुलिस के अनुसार सर्वजीत सिंह लोधी इस मामले में करीब दो साल से फरार चल रहे थे। पुलिस ने उनके खिलाफ इनाम (₹3,000) भी घोषित किया था। 5-6 जुलाई 2026 को बांदरी थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में पेश करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में खुरई जेल भेज दिया गया।

तो इसमें प्रॉब्लम क्या है?

सीधे देखे तो एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हुआ। पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी दो साल तक फरार रहा। ₹3000 का इनाम घोषित हुआ। मतलब गिरफ्तारी में कोई प्रॉब्लम नहीं है। ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी होनी चाहिए लेकिन यहां पॉलिटिक्स भी इंवॉल्व है। श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने पहले बयान में लिखा था- "2 वर्षों से इस प्रकरण में असमंजस बनाए रखना और फिर गिरफ्तार करना यह सिर्फ अपमानित करने की कोशिश है"। 

निष्कर्ष
मतलब मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल इस बात से नाराज नहीं है कि सर्वजीत सिंह को गिरफ्तार क्यों किया? बल्कि वह इस बात से नाराज हैं कि, 2 वर्षों से इस प्रकरण में असमंजस क्यों बनाए रखा? श्री प्रहलाद सिंह के बयान का अर्थ तो यही निकलता है कि सर्वजीत सिंह की इस प्रकार से गिरफ्तारी, उनको अपमानित करने की कोशिश है। शायद पर्दे के पीछे कोई पॉलिटिक्स चल रही थी, जिसमें श्री प्रहलाद सिंह पटेल धोखे का शिकार हो गए। वह सोशल मीडिया पर इस प्रकार के फोटो और मैसेज पोस्ट करके यह बता रहे हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए वह सर्वजीत सिंह के साथ हैं, और अब यह लड़ाई आगे बढ़ेगी।

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