भोपाल (10 सितंबर 2026): स्कूल शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने और नई शिक्षक भर्ती को लेकर लगातार मांगें उठाई जा रही हैं। अभ्यर्थियों की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर संवेदनशील माहौल बनाया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि यदि अभ्यर्थियों की मांग को स्वीकार कर दिया जाए तो भर्ती प्रक्रिया, नियमावली, आरक्षण व्यवस्था, विषयवार जरूरत और सेवारत शिक्षकों के अधिकार, सबका उल्लंघन हो जाएगा। वह ऐसी चीज मांग रहे हैं जो उनकी है ही नहीं, और उपलब्ध भी नहीं है। यह बात कुछ बिंदुओं से स्पष्ट हो जाती है:-
जो पद रिक्त हैं वह कौन से हैं, जानिए
पॉइंट नंबर 1: विभाग में सीधी भर्ती के तहत अधिकांश रिक्त पद गणित एवं विज्ञान विषयों से संबंधित हैं। ऐसे में इन विशेष विषयों के पदों पर अन्य विषयों (आर्ट एवं कॉमर्स) के अभ्यर्थियों को नियुक्ति की पात्रता नहीं दी जा सकती।
पॉइंट नंबर 2: अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण बैकलॉग के पद बड़ी संख्या में रिक्त पड़े हैं। नियमों के अनुसार इन पदों पर अन्य प्रवर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति संभव नहीं है।
पॉइंट नंबर 3: उपलब्ध कुल रिक्त पदों में से लगभग 59,000 पद पदोन्नति (Promotion) के लिए तय हैं। शान द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार इन पदों पर सेवारत शिक्षकों को पदोन्नति देकर ही भरा जा सकता है।
आंदोलनकारियों और नए अभ्यर्थियों से जुड़े ध्यानार्थ बिंदु:
प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थी स्वयं को चयनित शिक्षक बता रहे हैं, जबकि उनके नाम न तो चयन सूची में हैं और न ही प्रतीक्षा सूची में। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में बड़ी संख्या में नए उम्मीदवारों ने आवश्यक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता प्राप्त की है। ऐसे में नए योग्य युवाओं को होल्ड करके केवल प्रदर्शन के आधार पर नियुक्ति कैसे दे सकते हैं।
