यह रहा सरकारी शिक्षकों को TET के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की अनुमति और आदेश

Updesh Awasthee
भोपाल, 5 सितंबर 2026:
मध्य प्रदेश में शिक्षकों के जितने संगठन और नेता हैं, उतने किसी भी जाति, वर्ग, समाज और संप्रदाय में नहीं है। कई शिक्षक नेताओं ने, पात्रता परीक्षा के मामले में एक भ्रम फैला रखा है कि डिपार्टमेंट से जब तक आदेश और अनुमति नहीं मिलेगी तब तक फॉर्म नहीं भरेंगे। जबकि डिपार्टमेंट द्वारा 21 अगस्त 2026 को ही आदेश और अनुमति जारी कर दी गई है। 

Here is the School Education Department's permission and order for government teachers regarding the TET

कृपया नोट करें कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल एक परीक्षा एजेंसी है। परीक्षा का आयोजन करना उसकी जिम्मेदारी है। परीक्षा के नोटिफिकेशन के साथ जो रूल बुक जारी की जाती है, वह संबंधित डिपार्टमेंट की ओर से जारी हुआ आधिकारिक दस्तावेज होता है। रूल बुक में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी की गई "प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (सेवारत शिक्षकों हेतु) नियम पुस्तिका एवं पाठ्यक्रम" संलग्न है। इसके अंत में पेज क्रमांक 6 पर अपर संचालक लोक शिक्षण एवं अपर संचालक जनजातीय कार्य द्वारा जारी किए जाने का उल्लेख भी है। परीक्षा योजना भी अपर संचालक लोग शिक्षक के हस्ताक्षर से ही जारी की गई है। यहां तक की ऑनलाइन आवेदन में नियुक्ति का मूल आदेश अपलोड करने, एवं अन्य सभी जानकारी देने का का नियम भी है। 

इस प्रकार रूल बुक में योग्यता एवं परीक्षा हेतु अनुमति एवं आदेश स्पष्ट रूप से दी गई है। इसमें कर्मचारी चयन मंडल केवल एक पुस्तक का प्रकाशक है, बिल्कुल वैसे ही जैसे गजट नोटिफिकेशन होता है। यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि, प्रमोशन अथवा योग्यता में वृद्धि के लिए, कर्मचारियों को अनुमति हेतु आवेदन करना होता है, लेकिन यह परीक्षा योग्यता में वृद्धि के लिए नहीं बल्कि, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित की गई योग्यता को प्राप्त करने के लिए आयोजित की जा रही है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी को अनुमति के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। 

यह बिल्कुल वैसे ही विशेष परिस्थिति है जैसी, कानून और व्यवस्था की स्थिति स्थापित करने के लिए कलेक्टर द्वारा धारा 144 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163) लगाई जाती है। इसके बारे में प्रत्येक नागरिक को व्यक्तिगत रूप से नहीं बताया जाता बल्कि एक सार्वजनिक सूचना के माध्यम से जानकारी दी जाती है जो सभी नागरिकों पर लागू होती है। ऐसी स्थिति में कोई भी नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के लिए अलग से और व्यक्तिगत आदेश की मांग नहीं कर सकता। 

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