भोपाल, 5 सितंबर 2026: पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने सरकारी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा के मामले में सवाल किया है कि मध्य प्रदेश में शिक्षकों के साथ घोर अन्याय क्यों किया जा रहा है। पात्रता परीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को स्वतंत्र किया है, कांग्रेस शासित राज्यों द्वारा शिक्षकों की बातों का परीक्षा नहीं ली जा रही है, तो फिर मध्य प्रदेश में शिक्षकों को इस प्रकार से परेशान क्यों किया जा रहा है।
Why are you perpetrating gross injustice against teachers in Madhya Pradesh? Digvijaya Singh asked
श्री दिग्विजय सिंह आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती परीक्षा के बाद रिक्त पदों में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की भूख हड़ताल में शामिल होने के लिए आए थे। पूर्व में उन्होंने 24 घंटे के उपवास का ऐलान किया था। इसी दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट में जो जनहित याचिका लगी थी वह प्राइवेट स्कूलों के बारे में थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा का आदेश दिया है लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को स्वतंत्र कर दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में वरिष्ठ और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों पर थोपे जा रहे नए पात्रता परीक्षा नियमों का कड़ा विरोध और इसे 'घोर अन्याय' करार दिया।
श्री दिग्विजय सिंह ने, शिक्षा को समवर्ती सूची का विषय बताते हुए कांग्रेस शासित राज्यों और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा इस आदेश को लागू न करने के रुख का उल्लेख किया। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस नियम को तुरंत वापस लेने की मांग की है, साथ ही पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत से हस्तक्षेप करने की अपील की है।

