मध्य प्रदेश में राजपत्रित अधिकारी भी कलेक्टर बनेंगे, IAS अवार्ड मिलेगा

Updesh Awasthee
भोपाल, 1 सितंबर 2026:
मध्य प्रदेश के विकास और व्यवस्था के सभी प्रकार के दरवाजे खोल रहे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बिना किसी इवेंट के एक और बड़ा काम करने जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के राजपत्रित अधिकारियों को उनका हक देने जा रहे हैं, जो 2016 में छीन लिया गया था। अब मध्य प्रदेश में राजपत्रित अधिकारी भी कलेक्टर बनेंगे। वह राज्य प्रशासनिक सेवा में नहीं है, फिर भी उनको भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल किया जाएगा। 

2016 में शिवराज सरकार ने प्रक्रिया को बंद कर दिया था

मध्य प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ ने इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है। संघ की ओर से कहा गया है कि भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी नियमों में मध्यप्रदेश के राजपत्रित अधिकारियों (गैर प्रशासनिक सेवा) के अफसरों को भी आईएएस अवार्ड किए जाने के प्रावधान हैं। इस प्रक्रिया का पालन प्रदेश में वर्ष 2016 के बाद से नहीं किया जा रहा है जबकि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को हर साल डीपीसी के जरिये आईएएस अवार्ड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री से इस संबंध में हस्तक्षेप करने और गैर प्रशासनिक सेवा के राजपत्रित अधिकारियों को आईएएस अवार्ड की कैटेगरी में शामिल करने की मांग की जा रही है।

THE INDIAN ADMINISTRATIVE SERVICE (RECRUITMENT) RULES, 1954

मप्र में आईएएस अधिकारियों का मंजूर कैडर 459 पदों का है। इसमें डायरेक्ट रिक्रूटमेंट कैडर का 28.3 से 33.3% तक पद एसएएस अफसरों के लिए होता है और इसका 15% नॉन एसएएस के लिए है, लेकिन नॉन एसएएस के पद बनाते समय इसका पालन नहीं होता। आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना जैसे राज्यों में लगातार पद मिल रहे हैं। आईएएस भर्ती नियम-4 भी कहता है कि नॉन एसएएस अधिकारी यदि 8 वर्ष से डिप्टी कलेक्टर के समकक्ष पद पर काम कर रहा है तो वह आईएएस अवॉर्ड के लिए पात्र होगा। नियम- 8 में आईएएस में पदोन्नति एवं चयन के प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।

2016 के बाद मध्य प्रदेश में प्रक्रिया ठप

केंद्र सरकार ने 1997 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (चयन द्वारा नियुक्ति) विनियम के तहत राज्य सरकार के उन अधिकारियों के लिए IAS में आने का रास्ता खोला था, जो राज्य प्रशासनिक सेवा का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन राजपत्रित पदों पर कार्यरत हैं। मध्य प्रदेश में इस व्यवस्था के अंतर्गत सबसे अंतिम आईएएस चयनित अफसर मंजू शर्मा, संजय गुप्ता, श्रीकांत पांडेय और शमीमुद्दीन रहे हैं, जो वर्ष 2016 में आईएएस बने थे। वर्ष 2016 के बाद से प्रदेश में गैर-एसएएस अधिकारियों के लिए IAS अवार्ड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। नॉन-एसएएस अधिकारियों का आरोप है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की लॉबिंग के चलते उनकी दावेदारी लगातार प्रभावित होती रही है। 

गुजरात, झारखंड और बंगाल में लगातार मौका 

एमपी के राजपत्रित अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ एसके गांधी का कहना है कि दूसरे राज्यों ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2024 और 2025 में आठ राज्यों ने 37 गैर-एसएएस अधिकारियों को IAS अवार्ड दिया है। पिछले दो वर्षों में वर्ष 2024 में 15 और 2025 में 22 गैर-एसएएस अधिकारियों का IAS में चयन हुआ। इनमें तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, झारखंड, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्य शामिल हैं। पश्चिम बंगाल, गुजरात और झारखंड ने गैर-एसएएस अधिकारियों को IAS में शामिल करने के मामले में लगातार अवसर दिए हैं। 

लीगल नॉलेज: नियम क्या कहते हैं

भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (चयन द्वारा नियुक्ति) विनियम, 1997 [IAS (Appointment by Selection) Regulations, 1997] में गैर-राज्य प्रशासनिक सेवा (Non-SCS) के राजपत्रित अधिकारियों को आईएएस में चयन/अवार्ड करने के प्रावधान हैं। 

ये विनियम भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियम, 1954 के नियम 8(2) और नियम 4(1)(c) के अंतर्गत बनाए गए हैं। नियम 8(2) के अनुसार विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार की सिफारिश पर उन अधिकारियों का चयन किया जा सकता है जो: 
  • राज्य सिविल सेवा के सदस्य नहीं हैं,
  • राजपत्रित पद पर स्थायी रूप से कार्यरत हैं,
  • उत्कृष्ट योग्यता और क्षमता रखते हैं, तथा
  • डिप्टी कलेक्टर के समकक्ष पद पर कम से कम 8 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं। 

इस कोटे की सीमा पदोन्नति कोटे (कुल सीनियर पोस्ट का अधिकतम 33⅓ प्रतिशत) का 15 प्रतिशत तक रखी गई है। मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों पर ये प्रावधान लागू होते हैं। प्रदेश में 2015-16 के बाद इस प्रक्रिया का नियमित पालन नहीं हो रहा था, जिसके कारण राजपत्रित अधिकारी संघ इसकी मांग कर रहा है। 

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