MP शिक्षक ई-अटेंडेंस: शिक्षकों को मिलेगी बड़ी राहत, आयुक्त के ऑफिस में ड्राफ्टिंग शुरू

Updesh Awasthee
भोपाल, 26 जुलाई 2026
: मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों के विरोध के बीच स्कूल शिक्षा विभाग अब उन्हें बड़ी राहत देने की तैयारी कर रहा है। विभाग जल्द ही जिलों में पदस्थ संकुल प्राचार्यों को अधिकार (पॉवर डेलिगेट) सौंपने जा रहा है, जिससे उचित कारण होने पर वे अपने विद्यालय क्षेत्र के शिक्षकों को ई-अटेंडेंस लगाने में देरी होने पर राहत दे सकेंगे। आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय इसके लिए एक ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। 

97 से 98 प्रतिशत शिक्षक रोज लगा रहे हाजिरी 

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने जानकारी दी कि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब पूरी तरह से सामान्य हो चुकी है। वर्तमान में रोजाना लगभग 97 से 98 प्रतिशत शिक्षकों द्वारा ई-अटेंडेंस दर्ज की जा रही है। इसी सफलता को देखते हुए अब संकुल प्राचार्यों को शिक्षकों की व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए यह अधिकार सौंपे जा रहे हैं।

देरी पर अपनाया जाएगा व्यावहारिक दृष्टिकोण 

आयुक्त सिंह ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य शिक्षकों को प्रताड़ित या दंडित करना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और प्रभावी सिस्टम को लागू करना है। संकुल प्राचार्यों के लिए जल्द ही मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किए जाएंगे, जिनमें यह स्पष्ट होगा कि किस तरह के मामलों में देरी होने पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए राहत दी जा सकती है। हालांकि, इन निर्देशों में यह भी साफ किया जाएगा कि संकुल प्राचार्य अपनी मनमानी न कर सकें और ई-अटेंडेंस प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। 

सॉफ्टवेयर की समस्याओं का होगा समाधान, जून का रुका वेतन भी मिलेगा 

शिक्षकों के लिए एक और बड़ी राहत की खबर यह है कि जिन शिक्षकों का जून महीने का वेतन ई-अटेंडेंस न लगने के कारण रोका या काटा गया था, उन्हें वह वेतन वापस दे दिया जाएगा। हालांकि, यह निर्णय केवल उन्हीं शिक्षकों पर लागू होगा जिनका जुलाई और अगस्त महीने का ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड बिल्कुल सही रहा है।

आदतन देर से आने वाले या जानबूझकर ई-अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों के वेतन में कटौती की कार्रवाई जारी रहेगी। इसके अलावा, 'अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा' के पदाधिकारियों द्वारा सॉफ्टवेयर को लेकर बताई गई तकनीकी दिक्कतों में भी सुधार कराया जाएगा। शिक्षक अपनी व्यावहारिक समस्याओं को अभी भी अपने संकुल प्राचार्यों के संज्ञान में ला सकते हैं, जिस पर उचित सुनवाई की जाएगी।

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