आपने अक्सर देखा होगा, खबरों में पढ़ा और सुना होगा, पब्लिक ने किसी चोर को पकड़ लिया, किसी भागते हुए अपराधी को पकड़ लिया, किसी छुपे हुए वारंटी को पकड़ लिया। सवाल यह है कि जब भारतीय है न्याय संहिता के अनुसार किसी भी व्यक्ति का रास्ता रोकना तक अपराध है, तो फिर पब्लिक किसी भागते हुए अपराधी को किस अधिकार के साथ पकड़ लेती है। क्या ऐसा करके पब्लिक भी कोई अपराध कर रही होती है? क्या पकड़ा गया अपराधी, उसको पकड़ने वाले किसी व्यक्ति या पब्लिक के खिलाफ रास्ते में रोकने और बल प्रयोग करने का मामला दर्ज करवा सकता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 40 और 43 में अपराधी को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है। धारा 43 में बताया गया है कि एक पुलिस अधिकारी, किसी अपराधी को पकड़ने के लिए क्या कर सकता है और यदि अपराधी सरेंडर ना करे तो क्या कर सकता है। जबकि धारा 40 में यह बताया गया है कि, कोई आम व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह, मतलब पब्लिक, किस प्रकार की अपराधी को पकड़ सकती है, किन परिस्थितियों में पड़ सकती है। यह भी बताया गया है कि अपराधी को पकड़ लेने के बाद क्या करना पड़ेगा। यदि पब्लिक ने पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया तो फिर वह कानून तोड़ने का अपराध कर रही है। इसी धारा का दुरुपयोग करते हुए, भारत के कई इलाकों में मोब लिंचिंग हो जाती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 40 और 43
यह संहिता मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक कानून (Procedural Law) है, जो पुलिस और आम नागरिकों द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी (Arrest) की प्रक्रिया और नियमों को निर्धारित करती है।
BNSS धारा 40: प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी और ऐसी गिरफ्तारी पर प्रक्रिया (Arrest by private person and procedure on such arrest)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधान तय करते समय, कानून बनाने वालों के सामने सवाल यह था कि, क्या एक आम नागरिक (प्राइवेट व्यक्ति) भी किसी अपराधी को पकड़ या गिरफ्तार कर सकता है? लंबे विचार विमर्श के बाद प्रावधान किया गया:- हाँ, कानून आम जनता को भी यह असाधारण शक्ति देता है, बशर्ते अपराधी ने उनकी उपस्थिति में कोई गंभीर या संज्ञेय अपराध किया हो।
"कानूनी रूप से धारा 40(1) कहती है कि कोई प्राइवेट व्यक्ति (Private person) किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसकी उपस्थिति (presence) में अजमानतीय (non-bailable) और संज्ञेय अपराध (cognizable offence) करता है, या किसी उद्घोषत अपराधी (proclaimed offender) को गिरफ्तार (arrest) कर सकता है या करवा सकता है। ऐसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना (without unnecessary delay), छह घंटे के भीतर (within six hours), पुलिस अधिकारी (police officer) के हवाले कर देगा या पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में उसे अभिरक्षा (custody) में निकटतम पुलिस थाने (police station) ले जाएगा या भिजवाएगा।"
याद रखिए यहां पर "संज्ञेय अपराध" का मतलब है गंभीर अपराध। मतलब ऐसा अपराध जिसमें पुलिस थाने से जमानत का प्रावधान नहीं है।
BNSS धारा 43: गिरफ्तारी कैसे की जाएगी
जब पुलिस या कोई व्यक्ति किसी को गिरफ्तार करता है, तो उसकी वास्तविक प्रक्रिया क्या होती है? क्या केवल "यू आर अंडर अरेस्ट" कहना काफी है? कानून कहता है कि समर्पण न होने की स्थिति में शरीर को छूना आवश्यक है।
कानूनी शब्दों में: "धारा 43(1) के अनुसार, गिरफ्तार करने में (in making arrest) पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के शरीर को वस्तुतः छुएगा या परिरुद्ध करेगा (shall actually touch or confine the body), जब तक कि उसने वचन या कर्म (word or action) द्वारा अपने को अभिरक्षा में समर्पित (submitted to custody) न कर दिया हो। यदि वह व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी के प्रयास का बलात् प्रतिरोध (forcible resistance) करता है या बचने का प्रयत्न करता है, तो पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक सब साधनों (all necessary means) का उपयोग कर सकता है।
महिलाओं की गरिमा के लिए नियम है कि उन्हें सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पहले (after sunset and before sunrise) गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के, जिसके लिए महिला पुलिस अधिकारी को लिखित रिपोर्ट के साथ प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट (Magistrate of the first class) की पूर्व अनुमति (prior permission) लेनी होगी।" लेखक: उपदेश अवस्थी (लीगल एडवाइजर एवं पत्रकार)।

