BHOPAL NEWS: जीजी फ्लाईओवर के ठेकेदार के खिलाफ कलेक्टर का ऐलान, हम हाईकोर्ट को सत्य बताएंगे

Updesh Awasthee
भोपाल, 05 सितंबर 2026:
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आजकल कलेक्टर और गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक निर्मित जीजी फ्लाईओवर के ठेकेदार मेसर्स VKSC INFRAPROJECTS LIMITED, BHOPAL के बीच तनातनी चल रही है। PWD द्वारा ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया था। ठेकेदार वहां नहीं गया जहां अधिकारी चाहते थे बल्कि हाईकोर्ट चला गया। हाई कोर्ट ने ठेकेदार का नाम ब्लैक लिस्ट से हटवा दिया, लेकिन आज कलेक्टर ने ठेकेदार पर एक और हमला किया है। ऐलान किया है कि अब हाई कोर्ट में ही लड़ाई होगी, हम भी अपना पक्ष रखेंगे और अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करेंगे। मामला भारतीय संविधान 1872 का है। प्रशासनिक अधिकारी अक्सर इसका दुरुपयोग करते हैं और विभिन्न प्रकार के काल्पनिक प्रेशर के चलते ठेकेदार कोर्ट के दरवाजे तक नहीं जाते। यह वाला ठेकेदार चला गया था।

संभागीय जनसंपर्क अधिकारी भोपाल श्री अरुण शर्मा ने बताया कि, जीजी फ्लाईओवर (अम्बेडकर सेतु) का निर्माण 31 दिसंबर 2024 को पूर्ण किया गया था। अनुबंध के अनुसार कार्य की दोष दायित्व अवधि (DLP) 30 दिसंबर 2029 तक निर्धारित है। इस अवधि में निर्माण अथवा संधारण से संबंधित कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार संस्था की है। फ्लाईओवर के निर्माण के बाद इसकी बियरिंग कोट में खराबी सामने आई थी, जिसका सुधार ठेकेदार संस्था द्वारा कराया गया था। वर्तमान वर्षाकाल में बियरिंग कोट में पुनः खराबी परिलक्षित होने के साथ ही संधारण से जुड़ी अन्य कमियां भी सामने आईं। निरीक्षण के दौरान फ्लाईओवर के ड्रेनेज स्पाउट तथा रेनवॉटर डाउनटेक पाइपों के चोक एवं क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्षाजल की निकासी बाधित पाई गई। इसके कारण कुछ स्थानों पर वर्षाजल सीधे सड़क पर गिर रहा था। एक्सपेंशन जॉइंट से जल रिसाव, फ्लाईओवर के नीचे स्थित सर्विस रोड पर जलभराव, गड्ढों का निर्माण तथा कुछ स्थानों पर पानी रुकने जैसी समस्याएं भी सामने आईं। 

श्री शर्मा ने बताया कि, विभाग द्वारा इन सभी कमियों को सूचीबद्ध करते हुए ठेकेदार संस्था को समय-सीमा में सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए गए। लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार संस्था को 31 जुलाई 2026 तथा पुनः 11 अगस्त 2026 को आवश्यक सुधार एवं संधारण कार्य कराने के निर्देश जारी किए थे। अनुबंध की शर्तों के अनुसार ठेकेदार संस्था को 15 दिवस के भीतर सभी कमियां दूर करनी थीं, लेकिन निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार कार्य पूर्ण नहीं किया गया। अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार संस्था द्वारा निर्धारित समय में सुधार कार्य नहीं किए जाने की स्थिति में विभाग को संबंधित कार्य उसके हर्जे-खर्चे पर कराने का अधिकार है। इसके तहत कार्य पर होने वाली संपूर्ण लागत तथा उस लागत पर 20 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि ठेकेदार संस्था से वसूल की जाती है। इन्हीं प्रावधानों के अंतर्गत विभाग द्वारा अम्बेडकर सेतु की खामियां दूर करने के लिए 4.69 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की गई थी। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा पृथक से कोई बजट, अतिरिक्त आवंटन अथवा अतिरिक्त व्यय प्रस्तावित नहीं किया गया।

यहां यह उल्लेखनीय है कि डीएलपी अवधि में विभाग के पास ठेकेदार संस्था की परफॉर्मेंस गारंटी की बैंक गारंटी जमा रहती है। विभाग द्वारा संधारण का कार्य इसी परफॉर्मेंस गारंटी की राशि को जब्त कर उससे कराया जाना प्रावधानित किया गया था। ठेकेदार संस्था द्वारा फ्लाईओवर पर कुछ आंशिक सुधार कार्य किए जाने के साथ ही विभाग की नवीन निविदा प्रक्रिया के विरुद्ध मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका प्रस्तुत की गई। उच्च न्यायालय ने फिलहाल विभाग द्वारा जारी नवीन निविदा प्रक्रिया पर स्थगन दिया है। साथ ही ठेकेदार संस्था को फ्लाईओवर की सभी कमियां दूर करने तथा किए गए सुधार कार्यों का पालन प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

संधारण कार्य में लापरवाही बरतने के कारण ठेकेदार संस्था के पंजीयन को ब्लैकलिस्ट में दर्ज करने के संबंध में विभाग द्वारा 11 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। ठेकेदार संस्था द्वारा नोटिस के उत्तर में प्रस्तुत जवाब का विभागीय स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है एवं विस्तृत उत्तर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की कार्यवाही की जा रही है। विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण कार्य के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया गया है कि किसी भी एजेंसी द्वारा किया गया खराब एवं गुणवत्ताहीन कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रेस नोट क्रमांक/892/019. 
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