भोपाल, 3 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह द्वारा अभ्यर्थियों के समक्ष अप्रिय शब्दों का प्रयोग करने के बाद Department of School Education, Madhya Pradesh ने दो-तीन सितंबर की मध्य रात्रि रात्रि 12:33 बजे फेसबुक पर एक स्पष्टीकरण जारी किया। जिसमें लिखा, किसी भी विज्ञापन में विज्ञापित पदों की संख्या को परीक्षा परिणाम आ जाने के बाद बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता है। यह विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत है। सुबह अभ्यर्थियों ने 26 नवंबर 2022 को DPI द्वारा जारी सर्कुलर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। सीधा सरल सवाल है, जब 2022 में पद वृद्धि की गई थी तो फिर 2026 में क्या प्रॉब्लम है?
जब यह सर्कुलर जारी हुआ तब विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत कहां था?
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लगता है कि, सारी नॉलेज उनके पास ही है, कानून बनाने का अधिकार भी उनके पास है और कानून को शिथिल कर देने का अधिकार भी उनके पास है। पत्र क्रमांक/UCR/C/157/2022/2148 भोपाल दिनांक 26/11/2022 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि, 2022 से 24 तक हजारों शिक्षक रिटायर होने वाले हैं। इसलिए शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए 7500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की जाना है। जिन अभ्यर्थियों ने 2020 में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की है, 2023 में उपलब्ध रिक्त पदों पर, मेरिट के आधार पर उनकी नियुक्ति की जाएगी। कुल मिलाकर, प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2020 के शेष बचे 7500 अभ्यर्थियों की नियुक्ति 2023 में की गई। सवाल यह है कि जब 2022 में यह सर्कुलर जारी किया गया था, तब विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत कहां था?
आयुक्त अभय वर्मा और 7500 शिक्षकों को बर्खास्त करो
अब सिर्फ दो बातें होनी चाहिए। यदि स्कूल शिक्षा मंत्री रहते हैं कि, किसी भी विज्ञापन में विज्ञापित पदों की संख्या को परीक्षा परिणाम आ जाने के बाद बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता है। यह विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत है। तो उनको यह भी मानना होगा कि 2022 में तत्कालीन आयुक्त अभय वर्मा द्वारा जो 7500 अभ्यर्थियों की भर्ती की गई है, वह गलत है। यदि ऐसा है तो विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन करने वाले आयुक्त अभय वर्मा और विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत के उल्लंघन के परिणाम स्वरूप नियुक्ति प्राप्त करने वाले 7500 शिक्षकों को बर्खास्त करो। या फिर परंपरा का पालन करो।
प्रदर्शनकारियों ने दिग्विजय सिंह को नेता बनकर गलती कर दी
इस मामले में प्रदर्शनकारियों से सबसे बड़ी भूल एक ही हुई है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपना नेता घोषित कर दिया। 5 सितंबर शिक्षक दिवस के दिन जो प्रदर्शन होने वाला है, उसे अभ्यर्थियों की मांग पूरी हो या ना हो, कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह का गिरता वजन बढ़ जाएगा। इस कार्यक्रम के फोटो और वीडियो, या साबित करने के लिए पर्याप्त होंगे कि दिग्विजय सिंह, न केवल मध्य प्रदेश के सबसे शक्तिशाली और चतुर नेता हैं बल्कि जीतू पटवारी, उमंग सिंघार अथवा कांग्रेस के किसी भी युवा नेता और पदाधिकारी की तुलना में, युवाओं के ज्यादा विश्वासपात्र और लोकप्रिय हैं। यदि प्रदर्शनकारियों को लगता है कि दिग्विजय सिंह द्वारा एक दिन का उपवास करने से सरकार पर प्रेशर बढ़ जाएगा तो निश्चित तौर पर वह उसी गलतफहमी में हैं, जो 2019 में हुई थी। तब नेता का नाम श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया था। 2026 में सिर्फ नाम बदला है, टारगेट वही है। पिछली बार महाराज साहब ने फायदा उठाया था, इस बार राजा साहब फायदा उठाएंगे।


