सरकारी कर्मचारी की नैतिक अधमता कौन डिसाइड करेगा, हाई कोर्ट ने बताया

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 सितंबर 2026:
सरकारी कर्मचारियों को "नैतिक अधमता" के नाम पर अक्सर बर्खास्त कर दिया जाता है। बड़ी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, लेकिन हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि, सरकारी कर्मचारी की नैतिक अधमता कौन डिसाइड करेगा। आप किसी भी डिपार्टमेंट का प्रशासनिक अधिकारी "नैतिक अधमता" के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएगा। 

पूजा गुप्ता बरी हो गई फिर भी बर्खास्त रखा

पीड़ित कर्मचारी (असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (एडीपीपीओ)) पूजा गुप्ता के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का एक मामला दर्ज था। प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान 'नैतिक अधमता' के आधार पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इधर दिसंबर 2015 को ट्रायल कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए ससम्मान बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसके बावजूद गृह विभाग ने पूजा गुप्ता की सेवाएं बाहल नहीं की। जारी किए गए टर्मिनेशन ऑर्डर को इस दलील के साथ वैलिड करार दिया कि, भले ही कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया हो, लेकिन उन पर लगे आरोप 'नैतिक अधमता' की परिभाषा के दायरे में आते हैं।

The High Court has clarified who will determine the moral turpitude of a government employee

डिपार्टमेंट से पीड़ित होकर पूजा गुप्ता ने हाई कोर्ट में पिटीशन फाइल की। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'नैतिक अधमता' का निष्कर्ष केवल उसी ट्रायल कोर्ट से आना चाहिए था जिसने अधिकारी को बरी किया था, न कि उस प्रशासनिक अथॉरिटी से जिसने बिना कोई स्वतंत्र जांच किए ही सीधे उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

सुनवाई के दौरान पूजा गुप्ता ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए यह भी तर्क दिया कि उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में शामिल होने और फॉर्म भरने के दौरान ही अपने खिलाफ चल रहे इस कानूनी मामले और उसके बाद आए अदालती नतीजे की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से विभाग को दे दी थी, जिसे छिपाया नहीं गया था।

इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग के उस आदेश को पूरी तरह रद कर दिया है, जिसमें महिला असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (एडीपीपीओ पूजा गुप्ता) को प्रोबेशन पीरियड के दौरान 'नैतिक अधमता' के आधार पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। 

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