भोपाल समाचार, 8 मार्च 2026 : लोकसभा अथवा विधानसभा का बजट सत्र बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस सत्र में पता चल जाता है कि आने वाले साल में सरकार सचमुच क्या करने वाली है। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, हम आपको बताएंगे कि बजट सत्र में महिलाओं के लिए क्या-क्या फैसले हुए:-
मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं
लाड़ली बहना योजना के तहत वर्तमान में लगभग 1.25 करोड़ से अधिक बहनों को लाभ मिल रहा है और अब तक उनके खातों में 52,305 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्तमान में दी जा रही 1,500 रुपये प्रतिमाह की राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर वर्ष 2028 तक 3,000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। बजट में हुए प्रावधान के अनुसार इस वर्ष ₹250 का इंक्रीमेंट लगेगा। यानी 1750 रुपए मिलेंगे। सरकार ने पिछले रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनों को 250 रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि भी प्रदान की थी।
भोपाल गैस त्रासदी की 'कल्याणी' (विधवा) बहनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है।
बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति की महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह की सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है।
मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए शिक्षा और प्रोत्साहन योजनाएं
प्रदेश के कन्या शिक्षा परिसरों का नाम बदलकर 'माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर' और आहदित जाति कन्या छात्रावासों का नाम 'रानी मां दुर्गावती छात्रावास' करने का निर्णय लिया गया है।
सांदीपनि (CM Rise) विद्यालयों और कॉलेजों में दूर-दराज से आने वाली छात्राओं के लिए निःशुल्क बस सेवा शुरू की जा रही है।
मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए 7,890 छात्राओं को ई-स्कूटी/पेट्रोल स्कूटी और 94,300 छात्रों को लैपटॉप वितरण की योजना जारी है।
छात्राओं की सुरक्षा के लिए सभी कन्या छात्रावासों में बाउंड्री वॉल का निर्माण अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मध्य प्रदेश में महिलाओं का विवाह और सामाजिक संरक्षण
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए अब गरीबी रेखा (BPL) कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। वर्ष 2020 से अब तक इस योजना के तहत कुल 1,94,146 विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी पहल
प्रदेश में 4.22 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं की पोषण स्थिति पर नज़र रखने के लिए 'आधार फेस मैचिंग' (FRS) और अनमोल-2 पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
'स्वस्थ नारी सशक्त परिवार' अभियान के तहत 4.29 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।
मातृ शिशु संजीवनी मिशन और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था
लापता महिलाओं और बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए गए इस अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में 26,190 लापता बच्चियों को खोजकर उनके परिवारों को सौंपा गया है।
महिलाओं के लिए 'भयमुक्त पर्यटन' सुनिश्चित करने हेतु 45,000 से अधिक युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
पुलिस प्रशासन ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'महिला फीडबैक प्रणाली' और 'अभिमन्यु जागरूकता अभियान' को और सशक्त किया है।
मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए उद्यमिता एवं रोजगार
प्रदेश में कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में 47 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
लखपति दीदी योजना के तहत अब तक 28,204 महिलाओं को आजीविका प्रदान कर 'लखपति दीदी' की श्रेणी में लाया गया है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 61 लाख से अधिक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है।
12 आदिवासी बाहुल्य जिलों में आईटीआई और पॉलिटेक्निक की छात्राओं को विशेष रूप से सॉफ्ट स्किल्स और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा
आईटीआई (ITI) में आरक्षण: सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकारी आईटीआई में महिलाओं के लिए सीट आरक्षण 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया है।
'UN Women' के सहयोग से 12 आदिवासी बाहुल्य जिलों में 2,127 महिलाओं को STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) और सॉफ्ट स्किल्स का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
'लोकमाता देवी अहिल्याबाई कौशल विकास कार्यक्रम' के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की सुविधा के लिए 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों (पीथमपुर, मालनपुर, मंडीदीप आदि) के निकट 5,772 बिस्तरों की क्षमता वाले वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
'सेफ सिटी परियोजना' के तहत सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जा रही है।
मध्य प्रदेश में महिलाओं के लिए पोषण और बाल स्वास्थ्य
यशोदा दूध प्रदाय योजना के तहत आंगनवाड़ियों में बच्चों के साथ-साथ धात्री माताओं के पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 'मां यशोदा योजना' के तहत बच्चों को टेट्रा पैक दूध दिया जा रहा है, जिससे माताओं पर बच्चों के अतिरिक्त पोषण का वित्तीय बोझ कम हो।
प्रदेश की 24,662 आंगनवाड़ियों को सक्षम आंगनवाड़ियों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य परामर्श और पोषण मिल सके।
विशेष जनजातीय समूहों के लिए राहत
आहार अनुदान: बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) की महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह का आहार अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में दिया जा रहा है।
आवास और पट्टे: जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर आवास पट्टे जारी करने और रजिस्ट्री शुल्क में छूट देने के निर्णय लिए गए हैं ताकि वे संपत्ति की मालिक बन सकें।
इस प्रकार, महिलाओं से संबंधित निर्णयों का दायरा केवल 10 खंडों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और बुनियादी ढांचे जैसे कई अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश की महिलाओं ने मार्केट को लीड करना शुरू कर दिया है। महिलाएं अब पुरुषों की सहायता नहीं कर रही है बल्कि कई मामलों में पुरुषों से आगे निकल गई है। सरकार का लक्ष्य इन विभिन्न माध्यमों से 'GYAN' (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) विजन के तहत महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाना है।

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