मई की भीषण गर्मी में छात्रों और शिक्षकों की जान जोखिम में डालकर OJT का फरमान, लोक शिक्षण संचालनालय की तानाशाही

Updesh Awasthee

भोपाल, 28 अप्रैल 2026
: एक तरफ भीषण गर्मी और 'लू' (Heatwave) के प्रकोप को देखते हुए मध्य प्रदेश के अधिकतर जिलों में कलेक्टरों द्वारा विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाया जा सके। वहीं दूसरी ओर, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक तुगलकी फरमान जारी कर मई की तपती दोपहरी में व्यावसायिक शिक्षा के विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों पर ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (O.J.T.) का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

Students and Teachers Forced into OJT Amid Severe May Heat; Directorate of Public Instruction Under Fire

लोक शिक्षण संचालनालय ने 7 अप्रैल 2026 को जारी अपने पत्र (क्रमांक 1811) के जरिए निर्देश दिए हैं कि सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं के व्यावसायिक शिक्षा के विद्यार्थियों की न्यूनतम 20 दिवसीय ओ.जे.टी. 1 मई 2026 से 31 मई 2026 के बीच अनिवार्य रूप से आयोजित कराई जाए। इस आदेश में यह भी शर्त जोड़ दी गई है कि जिन विद्यालयों में ओ.जे.टी. कार्य संपन्न होगा, उन्हीं के व्यावसायिक प्रशिक्षकों को मई 2026 के मानदेय की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाएगी।  

​प्रशिक्षकों में भारी आक्रोश

विभाग का यह आदेश उन व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए किसी तानाशाही से कम नहीं है, जिन्हें अब अपनी जान जोखिम में डालकर चिलचिलाती धूप में ओ.जे.टी. के लिए भाग-दौड़ करनी होगी। जिससे कि विद्यार्थियों की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

​दोहरी मार: जहाँ एक ओर राज्य के विभिन्न जिलों में तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, वहीं विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ओ.जे.टी. नहीं हुई, तो मई महीने का मानदेय नहीं मिलेगा।  

​अवकाश के विपरीत निर्देश: एक तरफ जिला प्रशासन बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में छुट्टी घोषित कर रहा है, वहीं DPI का यह आदेश प्रशासन के इन प्रयासों के पूरी तरह विपरीत है।

​प्रशिक्षकों पर दबाव
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित विद्यालयों के प्राचार्य और व्यावसायिक प्रशिक्षक निकटतम उद्योग या संस्थान का निर्धारण कर 20 अप्रैल 2026 तक जानकारी जमा करें। इसके बाद 12 जून तक ओ.जे.टी. की रिपोर्ट भोपाल कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है। साथ ही, जिन स्कूलों में यह ट्रेड संचालित नहीं हैं, वहां के प्रशिक्षकों की सेवाएं 30 अप्रैल 2026 तक ही रखने का फरमान सुना दिया गया है।  

​शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का कहना है कि क्या विभाग को विद्यार्थियों और शिक्षकों की सेहत की कोई चिंता नहीं है? इस भीषण गर्मी में ओ.जे.टी. के नाम पर विभाग का यह अड़ियल रवैया न केवल संवेदनहीन है, बल्कि व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य और सम्मान के साथ साथ साथ विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है।
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