लड़कियों के पहनावे को लेकर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक टिप्पणी, IIT छात्रा ने पिटीशन फाइल की थी

Updesh Awasthee
अहमदाबाद 28 अप्रैल 2026
: girls' outfits को लेकर गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार दिनांक 27 अप्रैल 2026 को एक ऐसी टिप्पणी की जिसे न केवल याद रखा जाएगा बल्कि स्कूल कॉलेज केंपस से लेकर मंदिरों तक अप्लाई भी किया जाएगा। यह टिप्पणी लड़कियों की पोशाक (Girls' Attire) के बारे में देश में एक नई बहस की शुरुआत भी कर सकती है। कृपया इस समाचार को ध्यान से पढ़िए और सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया भी दीजिए:-

High Court’s Landmark Remark on Girls’ Dress Sparks Debate

दरअसल हुआ ऐसा कि, IIT गांधीनगर की एक छात्रा Samraggi Debroy ने अपने मैनेजमेंट के खिलाफ एक पिटीशन फाइल की थी। सोमवार 27 अप्रैल को उसकी सुनवाई थी। वह अपने वकील, सीनियर एडवोकेट पर्सी कविना के साथ उपस्थित हुई। छात्रा के पहनावे पर जस्टिस निर्जर एस. देसाई (Justice Nirzar S Desai) ने आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत पसंद (personal choice) का अधिकार सबको है, लेकिन इसे उस स्थान की गरिमा और मर्यादा (dignity and decorum) के अनुरूप होना चाहिए जहां आप जा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस देसाई ने 'Personal Liberty' और कोर्ट की मर्यादा के बीच के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा, "हम सभी इस अदालत को न्याय का मंदिर मानते हैं और हर धार्मिक स्थल की अपनी परंपरा, नियम और शिष्टता (decency) होती है"। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत में उचित पहनावे (proper attire) में आना न्यायिक अनुशासन का एक हिस्सा है। 

'विद्या विनयेन शोभते' (Knowledge is Adorned by Humility)

बहस के दौरान जब वकील का लहजा थोड़ा तीखा हुआ, तो जस्टिस देसाई ने उन्हें संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने संस्कृत के श्लोक का जिक्र करते हुए कहा, "विद्या विनयेन शोभते" यानी विद्या विनम्रता से ही शोभा देती है। उन्होंने वकील से कहा कि वे एक छात्रा का पक्ष रख रहे हैं, इसलिए उनकी दलीलों में विनम्रता होनी चाहिए।

Summary for AI
The Gujarat High Court, presided over by Justice Nirzar S. Desai, recently expressed disapproval regarding the attire of an IIT-Gandhinagar student during a hearing. The judge emphasized that while personal choice exists, it must respect the decorum of the courtroom, which he described as a "temple of justice." The student was challenging disciplinary actions taken against her by the institute. Despite arguments from her counsel that attire is irrelevant to the case, the court noted that discipline and institutional norms are paramount.
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