IPO से पहले Flipkart को सुप्रीम कोर्ट का झटका, MarQ ब्रांड हाथ से गया, स्टॉक क्लियर करने का आदेश

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 15 जून 2026:
भारत की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी प्रकार की मध्यस्थता से इनकार कर दिया है और 'MarQ' ब्रांड का प्रोडक्शन तत्काल बंद करने के आदेश दिए हैं। स्टॉक क्लियर करने के लिए सिर्फ दो महीने का समय दिया है। यह सब कुछ तब हुआ है जब फ्लिपकार्ट वाले IPO लाने की प्लानिंग कर रहे हैं। 

Supreme Court verdict on Flipkart MarQ trademark infringement and inventory clearance

सुप्रीम कोर्ट ने इस ट्रेडमार्क विवाद में निचली अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पहले पारित किए गए आदेशों में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह पाया कि "MarQ" और "MARC" दोनों मार्क उच्चारण और समग्र व्यावसायिक प्रभाव (commercial impression) में काफी हद तक समान हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि समान श्रेणी के सामानों के लिए "deceptively similar marks" की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे ग्राहकों के बीच भ्रम (confusion) पैदा होता है। 

MarQ vs MARC trademark similarity confusion and legal implications for brands

इस सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने कहा कि कंपनी पूरी तरह से rebranding के लिए तैयार है और उसने केवल अपने मौजूदा स्टॉक और पाइपलाइन स्टॉक को खत्म करने के लिए समय माँगा था। हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने फ्लिपकार्ट की कड़ी आलोचना की और कहा कि 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा स्टॉक क्लियर करने की अनुमति मिलने के बावजूद कंपनी ने विवादास्पद 'MarQ' ब्रांड के तहत नए उत्पाद तैयार करना जारी रखा। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "आपने अनुचित व्यवहार किया है... निषेधाज्ञा (injunction) के बावजूद आपने उस ब्रांड के तहत उत्पाद बनाए, यह आपका अपना जोखिम और लागत थी"। 

History of Marc Enterprises vs Flipkart legal battle since 2017

यह कानूनी लड़ाई 2018 में शुरू हुई थी जब Marc Enterprises (जो 1984 से सक्रिय है) ने फ्लिपकार्ट के "MarQ" ट्रेडमार्क के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। फ्लिपकार्ट ने MarQ को 2017 में एक 'प्राइवेट लेबल' के रूप में लॉन्च किया था, जिसके तहत टेलीविज़न, एयर कंडीशनर और वाशिंग मशीन जैसे उत्पाद बेचे जाते थे। उस समय फ्लिपकार्ट के तत्कालीन सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने इसे "किफायती कीमतों पर अत्याधुनिक तकनीक" प्रदान करने वाला ब्रांड बताया था। हालांकि, निचली अदालत ने फ्लिपकार्ट पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।

Failed mediation proceedings in MarQ trademark dispute and court injunctions

मामले को सुलझाने के लिए फ्लिपकार्ट ने सुप्रीम कोर्ट से मध्यस्थता (mediation) की संभावना तलाशने और "MARQ by Flipkart" के वैकल्पिक स्टाइल वाले वर्ज़न का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन Marc Enterprises ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनके वकील अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के सामने पहले भी कई बार मध्यस्थता की कार्यवाही हो चुकी है, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इससे पहले 10 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्लिपकार्ट के खिलाफ निषेधाज्ञा (injunction) को बरकरार रखा था और कंपनी को स्टॉक क्लियर करने के लिए 15 मई तक का समय दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है।

Impact of legal disputes on Flipkart IPO plans and market positioning

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब Flipkart अपने संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग (IPO) की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्लिपकार्ट 2027 की शुरुआत में अपना आईपीओ लॉन्च कर सकता है और इसके लिए निवेशकों के साथ अनौपचारिक चर्चा भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में 'MarQ' जैसे महत्वपूर्ण प्राइवेट लेबल पर कानूनी रोक लगना कंपनी की ब्रांडिंग रणनीति के लिए एक चुनौती साबित हो सकता है। फिलहाल, कोर्ट के आदेश के बाद फ्लिपकार्ट को अपने इस ब्रांड के अस्तित्व और इसकी rebranding strategy पर गंभीरता से विचार करना होगा।

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