भोपाल समाचार, 15 जून 2026: मध्य प्रदेश शासन द्वारा दिनांक 19 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार 26 जनवरी 2001 या इसके बाद तीसरी संतान वाले कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी जाती थी परंतु आज दिनांक 15 जून 2026 के बाद मध्य प्रदेश में तीसरी संतान के कारण किसी भी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा। इसलिए नहीं क्योंकि मुख्यमंत्री ने घोषणा की है बल्कि इसलिए क्योंकि डिप्टी सीएम ने एक एग्जांपल सेट कर दिया है। उन्होंने एक अधिकारी के सेवा समाप्ति के आदेश को स्थगित कर दिया है।
No Employee Will Be Dismissed for Having a Third Child in Madhya Pradesh
मामला वाणिज्य कर विभाग में उप-पंजीयक अशोक सिंह परिहार का है। श्री अशोक सिंह की पोस्टिंग सिंगरौली में थी। उनके खिलाफ तीसरी संतान मामले में शिकायत हुई थी। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था। इस आधार पर आईजी पंजीयन अमित तोमर ने दिनांक 11 जून 2026 को श्री अशोक सिंह परिहार का टर्मिनेशन आर्डर जारी कर दिया।
सामान्यत: ऐसे मामलों में बर्खास्त हुए कर्मचारियों द्वारा हाई कोर्ट में अपील की जाती है परंतु श्री अशोक सिंह परिहार ने अपने ही विभाग में अपील की। श्री अशोक सिंह का तर्क था कि, तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 में हुआ है, इसके 23 साल बाद उनको बर्खास्त कर दिया गया। निर्णय में 23 साल की देरी की गई, इसलिए यह निर्णय उचित नहीं है। मतलब देर से किया गया न्याय, अपनी मान्यता नहीं रखता। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने श्री अशोक सिंह की इस अपील को स्वीकार कर लिया और महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा 11 जून 2026 को जारी किए गए श्री अशोक सिंह परिहार के सेवा समाप्ति आदेश को अपील के निराकरण तक के लिए स्थगित कर दिया।
अब यह स्थगन आदेश, एक उदाहरण बन गया है। यदि किसी भी विभाग में किसी भी कर्मचारी को तीसरी संतान के कारण बर्खास्त किया जाता है तो वह शासन स्तर पर अपील करके इसी प्रकार अपने मंत्री से स्थगन आदेश प्राप्त कर सकता है और वापस नौकरी कर सकता है।


