भोपाल, 10 मार्च 2026 : कल शाम को मध्य प्रदेश के हजारों लोगों ने अधूरी जानकारी पर खुशी और दुख मनाया। यह खबर सही है कि हाईकोर्ट ने, विजयपुर विधानसभा सीट के विधायक श्री मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य और रामनिवास रावत को विधायक घोषित कर दिया है परंतु श्री मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 15 दिन का समय भी दिया है। यानी आज की तारीख में विजयपुर विधानसभा में किसी भी व्यक्ति के पास विधायक की शक्तियां नहीं है। ज्योतिष के अनुसार रामनिवास रावत को 3-3 ग्रहों ने मिलकर जिताया लेकिन श्री मुकेश मल्होत्रा की कुंडली में शायद प्रबल राजयोग है।
Three Planets Helped Ramniwas Rawat Win, But Malhotra’s Rajyog Is Strong: What Will the Supreme Court Decide?
वैदिक ज्योतिष का मार्गदर्शन - गोचर के अनुसार श्री रामनिवास रावत को शनि, राहु-केतु और गुरु (बृहस्पति) प्रभावित कर रहे हैं। छठे भाव के धनी ने शत्रु पर विजय दिलाई। शनिदेव के कारण श्री रावत यह मुकदमा जीत पाए। 11वें भाव के केतू अचानक लाभ का अवसर बनाते हैं। और नवे भाव में भाग्य स्थान में बृहस्पति देव का गोचर होने से भाग्य का साथ मिलता है। इन तीनों ग्रहों के गोचर के कारण ही श्री रामनिवास रावत को चुनाव याचिका में इतनी जल्दी फैसला मिल गया। सामान्य तौर पर इस तरह की चुनाव याचिकाएं 5 साल अथवा इससे अधिक के लिए पेंडिंग रहती है।
बृहस्पति ने 11वें भाव में बैठकर मुकेश मल्होत्रा की मदद की
श्री मुकेश मल्होत्रा की जन्म कुंडली में प्रबल राजयोग तो होगा ही लेकिन गोचर में बृहस्पति देव ने 11वें भाव में बैठकर श्री मुकेश मल्होत्रा की काफी मदद की। यह स्थिति श्री मुकेश मल्होत्रा के लिए एक वरदान की तरह साबित हुई है। सिर्फ इतना ही नहीं है, श्री मुकेश मल्होत्रा को विजयपुर में जनता का साथ मिलेगा और पार्टी हाई कमान के सामने स्थिति मजबूत होगी।
सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर
तो कुल मिलाकर समाचार यह है कि, हाईकोर्ट ने श्री मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य तो घोषित किया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए उनको 15 दिन का समय दिया है। तब तक हाई कोर्ट का निर्णय प्रभाव शून्य रहेगा। श्री मुकेश मल्होत्रा के वकील श्री विवेक तंखा ने कहा है कि, वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। अब सवाल यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट अपील को स्वीकार करने के बाद क्या अंतरिम निर्णय देता है।
सुप्रीम कोर्ट क्या कर सकता है
अपील स्वीकार करने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट तीन प्रकार के अंतरिम निर्णय दे सकता है। इसमें से सिर्फ एक अंतरिम आदेश मुकेश मल्होत्रा के लिए लाभदायक होगा। दूसरे प्रकार का निर्णय भी स्थिति को मजबूत बनाए रखेगा लेकिन तीसरे प्रकार का अंतरिम आदेश हानिकारक होगा। अपील तो स्वीकार हो जाएगी लेकिन मल्होत्रा जी विधायक नहीं रहेंगे। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट किस प्रकार के अंतरिम आदेश दे सकता है:-
पूर्ण स्थगन (Full Stay): यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि हाई कोर्ट के फैसले में कोई गंभीर कानूनी त्रुटि है या "prima facie" केस मजबूत है, तो वह हाई कोर्ट के आदेश पर पूरी तरह रोक लगा सकता है। ऐसी स्थिति में मुकेश मल्होत्रा विधानसभा की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे और उन्हें वोट देने का अधिकार भी होगा।
सीमित स्थगन (Conditional Stay): कोर्ट अक्सर ऐसे मामलों में यह आदेश देता है कि विधायक सदन की कार्यवाही में शामिल तो हो सकते हैं, लेकिन वे वोट नहीं दे पाएंगे या विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन-भत्ते तब तक नहीं लेंगे जब तक अंतिम फैसला न आ जाए। (जैसा कि इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण केस के समय हुआ था)।
अपील स्वीकार पर स्थगन नहीं: यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि हलफनामे में जानकारी छिपाने का मामला स्पष्ट है, तो वह अपील तो स्वीकार कर सकता है लेकिन हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से मना कर सकता है। इस स्थिति में रामनिवास रावत के विधायक के रूप में शपथ लेने का रास्ता साफ हो जाएगा।
Crux of the Case
हाई कोर्ट ने चुनाव शून्य घोषित करने का मुख्य आधार "आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाना" माना है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों (जैसे Union of India vs Association for Democratic Reforms) के अनुसार, मतदाता को उम्मीदवार के बारे में जानने का मौलिक अधिकार है। यदि मुकेश मल्होत्रा यह सिद्ध कर पाते हैं कि जो जानकारी छिपाई गई वह "महत्वपूर्ण" (Material) नहीं थी, तभी उन्हें राहत मिलने की संभावना है।
इस तरह की अपील में सुप्रीम कोर्ट क्या करता है
सुप्रीम कोर्ट इस प्रकार की अपील को तो तुरंत स्वीकार कर लेता है लेकिन पूर्ण स्थगन (Full Stay) नहीं देता। इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975): यह सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कृष्णा अय्यर ने सशर्त रोक (Conditional Stay) दी थी। उन्होंने कहा कि वे सदन की कार्यवाही में भाग ले सकती हैं, लेकिन वोट नहीं दे सकतीं और न ही बतौर सांसद वेतन ले सकती हैं।
जानकारी छुपाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट क्या करता है
इंदिरा गांधी का मामला सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का था। मुकेश मल्होत्रा का मामला जानकारी छुपाने का है। यह भी देखना होगा की जानकारी छुपाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख कैसा होता है:-
कृष्णमूर्ति बनाम शिवकुमार (2015): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर अपने आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाता है, तो यह मतदाताओं के "जानने के अधिकार" का उल्लंघन है। इसे "अनुचित प्रभाव" (Undue Influence) माना जाता है और ऐसे चुनाव को रद्द करना सही है।
पूनम बनाम दुले सिंह (2025/26 के हालिया निर्णय): कोर्ट ने हाल ही में दोहराया है कि यदि छिपाई गई जानकारी "Material" (महत्वपूर्ण) है, तो चुनाव शून्य घोषित करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 'Status Quo' (यथास्थिति) बनाए रखने के लिए हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा सकता है, ताकि अपील के अंतिम फैसले तक विजयपुर सीट खाली न हो या वहां प्रतिनिधित्व का संकट न आए। हालांकि, 'वोटिंग राइट्स' पर पाबंदी लगने की संभावना प्रबल रहेगी। और मुकेश मल्होत्रा को इस दौरान वेतन भत्ते भी नहीं दिए जाएंगे।

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