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UGC ACADEMIC CALENDAR 2020 जारी, कॉलेज कब खुलेंगे, कितनी छुट्टियां होंगी, पढ़ाई कैसे होगी, यहां पढ़िए

नई दिल्ली।
UGC- यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए शैक्षणिक कैलेंडर जारी कर दिया है। नियमित शिक्षा सत्र की शुरुआत 1 नवंबर 2020 से होगी। इससे पहले सितंबर-अक्टूबर के लिए ऑनलाइन क्लास संचालन के निर्देश दिए गए थे।

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर नया एकेडमिक कैलेंडर जारी किया है। सभी विश्वविद्यालयों को पहले वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने के भी निर्देश दिए हैं। पहले वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्रों की पहली परीक्षा मार्च 2021 में दूसरे हफ्ते में होगी। इस बीच नई गाइडलाइन में यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों से 18 नवंबर 2020 हर हाल में रिजल्ट घोषित करने को कहा है। ताकि समय से पढ़ाई शुरू हो सके। हालांकि ज्यादातर विवि अक्टूबर में ही रिजल्ट जारी करने की तैयारी में हैं। 

UGC GUIDELINE: कॉलेज एडमिशन रद्द कराने पर कितना रिफंड मिलेगा

यूजीसी ने इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक सत्र-2020-21 और 2021-22 में हफ्ते में छह दिन पढ़ाने का सुझाव दिया है। इस दौरान कम से कम छुट्टियां करने के भी निर्देश दिए हैं। वहीं यदि कोई छात्र 30 नवंबर तक अपना प्रवेश रद्द कराकर रिफंड लेना चाहता है, तो उसे बगैर कोई राशि काटे पूरी फीस लौटाई जाए। यदि कुछ राशि काटनी जरूरी हो, तो वह भी अधिकतम एक हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए।

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यूजीसी ने इसके साथ ही अपने दिशा-निर्देशों में सभी विवि और कालेजों के लिए गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी और प्रोटोकाल का पालन करना जरूरी बताया है। साथ ही सभी विवि और कालेजों से आनलाइन पढ़ाई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने पर भी जोर दिया है, ताकि Online पढ़ाई से जुड़ी गतिविधियों को आगे भी जारी रखा जा सके।

UGC GUIDELINE: किसकी सिफारिश पर फैसले लिए गए

कोरोना संक्रमण के चलते मार्च से ही बंद पड़े विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने को लेकर यूजीसी ने प्रोफेसर आरसी कुहाड की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। जिसकी सिफारिश के बाद यह फैसला लिया गया है। यूजीसी ने इससे पहले इसी कमेटी के सुझावों के आधार पर अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर भी निर्देश जारी किए थे।

जिसमें सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराना अनिवार्य था। हालांकि इसे लेकर कई राज्यों के साथ खूब विवाद हुआ, बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला सुलझा। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी विश्वविद्यालयों के लिए अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को जरूरी बताया था। साथ ही कहा था कि इसके बगैर किसी को भी प्रमोट नहीं किया जा सकता है।

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