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BHOPAL: हमीदिया ने स्टाफ नर्स को ही पति की मौत की सूचना नहीं दी, 3rd फ्लोर से शव खुद लेकर आयी - MP NEWS

भोपाल।
मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण के साथ ही मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इस बीच अस्पतालों में अव्यवस्थाओं को लेकर मरीजों के परिजनों का भी गुस्सा फूट रहा है। ऐसा ही मामला भोपाल के हमीदिया अस्पताल का सामने आया है। यहां पदस्थ नर्स ने ही अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

हमीदिया में स्टाफ नर्स प्रीति गनवीर ने वीडियो जारी किया है। ​​​​अस्पताल के कार्डियक डिपार्टमेंट में वह स्टाफ नर्स है। उनकी नौकरी को 7 साल हो गए हैं। प्रीति ने बताया कि उन्होंने पिछले एक साल में कोविड वार्ड में कई बार ड्यूटी की है। पिछले सप्ताह 21 अप्रैल को वह पति योगेश काले को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराने लेकर गई। वहां नर्सिंग इंचार्ज शोभा सिस्टर से पीपीई किट मांगी, तो उन्होंने मना कर दिया। फिर प्रीति ने खुद पीपीई किट का इंतजाम कर पति को भर्ती कराने पहुंची, तो गार्ड को उनके पीछे भेजकर तुरंत बाहर निकलने के लिए कहा गया।

वहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने उनसे परिचय पूछा, तो उन्होंने बताया कि वह अस्पताल में ही स्टाफ नर्स है। इस पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने उनकी डीन और अधीक्षक से शिकायत करने की धमकी देकर बदतमीजी की। वह पति को कोविड ए ब्लॉक में एडमिट कर चली गई। इसके बाद उनकी पति से बातचीत भी नहीं हो सकी। उन्होंने पति से बात करने के लिए वार्ड के नंबर पर कॉल किया, लेकिन किसी ने फोन तक नहीं उठाया।

प्रीति ने बताया, इसके बाद उनकी पति से बात नहीं हुई। उनको अंदर जाने नहीं दिया। 23 अप्रैल सुबह 5 बजे योगेश की मौत हो गई। प्रीति ने बताया कि उनके पति की मौत की सूचना न तो उनको दी गई और ना ही उनके परिवार में किसी को। उनकी परिचित जब वार्ड में ड्यूटी करने पहुंची, तो उन्हें इस बारे में बताया गया। प्रीति 12 बजे अस्पताल पहुंच गई। इसके बाद 3.30 बजे बॉडी लेकर ए ब्लॉक के थर्ड फ्लोर से नीचे आई। इतने समय तक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद वॉर्ड ब्वाय नहीं तक नहीं आए। प्रीति और उसके सहेली पति का शव स्ट्रेचर पर रखकर तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर तक लेकर आई। नीचे शव लाने पर भी गार्ड और इंचार्ज शोभा सिस्टर ने उनके साथ बदतमीजी की।

“हमारे संज्ञान में मामला आया है। हम इसकी जांच करा रहे हैं। जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे। अस्पताल में मरीज के गंभीर होने पर तुरंत सूचना दी जाती है। स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में है।
-लोकेन्द्र दवे, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

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