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किसानों को जून माह के लिए एडवाइजरी जारी, खरीफ की फसल की तैयारी - JABALPUR NEWS

जबलपुर।
खरीफ फसलों की तैयारी हेतु जून माह में किये जा सकने वाले कृषि कार्यों के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ एके सिंह ने किसानों को समसामयिक सलाह दी है। इस पर अमल कर कृषक खरीफ फसल की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

किसानों को मानसून से पहले क्या करना है

किसानों को सलाह दी गई है कि उर्वरकों का उपयुक्त प्रयोग करने के लिए आवश्यक है कि किसान मृदा परीक्षण हेतु मानसून से पूर्व विभिन्न खेतों से मृदा नमूना लेकर विश्लेषण हेतु प्रयोगशाला भेजें तथा अनुशंसा की गई खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें। किसान मानसून से पूर्व खेतों में पकी हुई गोबर की खाद अथवा कम्पोस्ट 8-10 टन प्रति हेक्टेयर के मान से समान रूप से वितरित कर जुताई करें।

खरीफ फसलों की बोनी हेतु आवश्यक तैयारियां क्या रखना है

किसान खरीफ फसलों की बोनी हेतु आवश्यक आदान जैसे बीज, बीज उपचार दवाईयां तथा उर्वरक की व्यवस्था करें। फॉस्फेटिक उर्वरक-डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की अनुप्लब्धता होने पर सिंगल सुपर फॉस्फेट (16 प्रतिशत) अथवा मोनो अमोनियम फॉस्फेट (11:52:0) अथवा एपी के उर्वरक 12:32:16 या 14:34:14 का प्रयोग करें।

फसलों के बीज का अंकुरण परीक्षण कैसे करें

किसान मानसून से पहले खरीफ मौसम में बोई जाने वाली फसलों के बीज का अंकुरण परीक्षण अवश्य करें। अंकुरण परीक्षण करने से पूर्व बीज को संसाधित कर स्वस्थ बीजों को अलग कर लें। स्वस्थ बीज के 100 दानों को जूट के गीले बोरे पर लाइन में डाल दें तथा गीले बोरे से ढंक दें। 4-5 दिन बाद अंकुरित नलिकाओं को गिनकर अंकुरण के आधार पर आवश्यकता अनुसार बीज बोने हेतु रखें। वांछित पौध संख्या के लिए अंकुरण परीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है।

खेत में बीजों को बोने से पहले उपचार कैसे करें

दलहनी फसलों जैसे मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन आदि के बीजों को बोने से पूर्व मिश्रित फफूंदनाशी कार्बोक्सिन एवं थीरम-2 ग्राम प्रति किग्रा बीज दर से प्रथम उपचार, इमिडाक्लोप्रिड 48 प्रतिशत एफएस-2 मिलीलीटर प्रति किग्रा बीज दर से द्वितीय उपचार तथा जैव उर्वरक-राइजोबियम व पीएसबी की 5-10 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज दर से तृतीय उपचार कर बोनी करें।

धान की अधिक उपज देने वाली किस्में यथा जेआर 206, जेआर 81, सहभागी, दंतेश्वरी, पूसा सुगंधा 3, पूसा सुगंधा 5, पूसा 1121, पूसा 1612, हाइब्रिड किस्में-जेआरएच 5, जेआरएच 8, जेआरएच 19 के बीजों की व्यवस्था कर मिश्रित फंफूदनाशी (कार्बोक्सिन एवं थीरम) की 2 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज के हिसाब से बीजोपचार कर जून के द्वितीय सप्ताह में नर्सरी डालें अथवा जून के अंतिम सप्ताह में सीधी बोनी करें।

सोयाबीन की उन्नत प्रजातियां यथा जेएस 20-29, जेएस 20-34, जेएस 95-60, जेएस 20-69, जेएस 20-98, आरव्हीएस 2001-4, जेएस 97-52, एनआरसी 7, एनआरसी 37 आदि की बीज उपचार उपरांत बुवाई करें।

मूंग की उन्नत प्रजातियां यथा पीडीएम 139, आईपीएम 94-1, एमएच 421, शिखा, विराट तथा उड़द की उन्नत प्रजातियां यथा पंत उड़द 30, पंत उड़द 31, पंत उड़द 40, आईपीयू 2-43, प्रताप उड़द 1 आदि की व्यवस्था करें। अरहर की अधिक पैदावार देने वाली किस्में यथा टीजेटी 501, पीके व्ही-तारा, राजीव लोचन, राजेश्वरी, आईसीपीएल 87 आदि की व्यवस्था कर अरहर सघनीकरण पद्धति विधि से रोपाई हेतु जून के प्रथम सप्ताह में 6 इंच चौड़ी व 9 इंच लम्बी पॉलीथीन थैलियों में मिट्टी-खाद का मिश्रण भरकर बीज डालकर नर्सरी तैयार करें। एक एकड़ खेत में एक मीटर कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी पर रोपाई हेतु 4000 पौधे की आवश्यकता होगी।

मक्का की अधिक उपज देने वाली प्रजातियां यथा जेएम 216, जेएम 218, जवाहर मक्का हाइब्रिड 1, यह क्यूपीएम 1, यह क्यूपीएम 3, जेकेएमएच 4545, सुरभि, पीएसी 745 आदि प्रजातियों की मिश्रित फंफूदनाशी (कार्बोक्सिन एवं थीरम) की 2 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज के हिसाब से बीजोपचार उपरांत बुवाई करें।

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