नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: मनरेगा के स्थान पर जी राम जी को रिप्लेस करने के मामले में एक तरफ कांग्रेस पार्टी मुखर होती जा रही है और दूसरी तरफ सरकार के पक्ष को उतना समर्थन नहीं मिल पा रहा है। संसद से लेकर सड़क तक इस मामले की लीडरशिप शिवराज सिंह चौहान के हाथ में थी। लगता है वह संभाल नहीं पाए और अब इस मूवमेंट को नितिन नवीन न टेकओवर कर लिया है।
G-Ram-JI मामले में शिवराज सिंह फेल क्यों हो गए
संसद में शिवराज सिंह चौहान ने खुद को अटल बिहारी पार्ट-2 प्रदर्शित करने की कोशिश की। प्रकृति का सिद्धांत कहता है कि जब आप किसी दूसरे का जैसा बनने की कोशिश करते हैं तो, ना तो उसके जैसा बन पाते हैं और ना ही अपने अस्तित्व में रह पाते हैं। आपकी अपनी पहचान भी खो जाती है। ऐसा ही कुछ शिवराज सिंह के मामले में हुआ। वह सदन में रटे रटाए डायलॉग बोलते हुए दिखाई दिए। उन्होंने अपने आप को इतना विनम्र और औपचारिक बना दिया था कि, वह बात करते हुए काम और अभिनय करते हुए ज्यादा दिखाई दे रहे थे।
ग्राम पंचायत के कर्मचारियों ने शिवराज सिंह को महत्व नहीं दिया
संसद से बाहर निकालने के बाद उन्होंने G-Ram-JI (in place of MANREGA) के समर्थन में जमीनी पकड़ बनाने के लिए ग्राम पंचायत के कर्मचारियों का एक सम्मेलन अपने घर पर बुलाया। यहां उन्होंने पंचायत का प्रशासनिक व्यय बढ़ाने का ऐलान किया और विश्वास दिलाया कि अब सभी कर्मचारियों का वेतन समय पर मिलेगा। यह कार्यक्रम पूरी तरह से फेल कर गया। भारत भर से कुल 100 लोग भी नहीं आए। श्री शिवराज सिंह द्वारा घोषणा करने के बाद भी ग्राम पंचायत के कर्मचारियों की ओर से उनके प्रति कोई समर्थन दिखाई नहीं दिया।
मनरेगा के मजदूर शिवराज सिंह को सुनने ही नहीं आए
मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को समझाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान संसद में Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025 (VB-G RAM G Act) प्रस्तुत करने के तत्काल बात से भारत की यात्रा पर निकल पड़े थे। लेकिन उनकी पूरी भारत यात्रा के दौरान मनरेगा के मजदूर दिखाई नहीं दिए। उनके भाषण सुनने वालों में या तो भाजपा के कार्यकर्ता थे या सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने वाले किसान और अन्य लोग। यह निष्कर्ष श्री शिवराज सिंह चौहान की सोशल मीडिया स्टडी के बाद कोई भी निकाल सकता है।
कांग्रेस का मूवमेंट लगातार मजबूत होता जा रहा है
दिनांक 27 दिसंबर 2025 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में मनरेगा को बचाने के लिए देशव्यापी आंदोलन का फैसला लिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर माहौल बनाया गया। 3 जनवरी 2026 को आंदोलन के टाइटल 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की घोषणा की गई। सिर्फ इतना ही नहीं आंदोलन का टाइम टेबल भी जारी किया गया जो 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इसमें ग्राम स्तर से प्रदेश स्तर तक कार्यक्रम, पदयात्राएं, जनसभाएं और चार बड़ी रैलियां शामिल हैं।
नितिन नवीन ने टेकओवर किया
ताजा खबर मिली है कि, कांग्रेस के संग्राम का सामना करने के लिए नितिन नवीन ने भाजपा के अभियान की घोषणा कर दी है। अब भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन स्तर पर कांग्रेस पार्टी का मुकाबला करेगी। भाजपा का नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही एक्टिव है। इसलिए भाजपा का मूवमेंट खड़ा होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।राजनीति में शॉर्ट-कट के लिए कोई जगह नहीं है, राजनीति लॉन्ग रन का काम है।
— Nitin Nabin (@NitinNabin) December 23, 2025
इसलिए धैर्यपूर्वक काम करिए, commitment के साथ काम करिए।
भाजपा का Watch Tower इतना मजबूत है कि निश्चित रूप से आपको बूथ से उठाकर केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा देगा। इसलिए आप बस अपने काम पर विश्वास कीजिए। pic.twitter.com/tumMaK6BOR
मौका चूक गए चौहान
इस मामले को यदि पॉलिटिक्स की नजर से देखें तो राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान दोनों के सामने मौका था। दिल्ली के किसी हाल में राहुल गांधी कितना भी बड़ा प्रेजेंटेशन दे दें, सोशल मीडिया पर उनकी कितनी भी REELs वायरल हो जाए लेकिन पॉलिटिक्स में वैल्यू तभी मिलती है जब नेता जमीन पर उतरे और जनता के बीच उसकी जड़ें मजबूत हो जाए। मनरेगा का मामला राहुल गांधी के सामने एक मौका था जब इंदिरा गांधी की तरह, गरीबों के नेता बन सकते हैं। राहुल गांधी ने मौके का पूरा फायदा उठाया है और पहली बार बलपूर्वक पूरी कांग्रेस पार्टी को उनकी छत्रछाया में खड़ा कर दिया गया है।
दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास मौका था कि जी राम जी के प्रचार प्रचार के बहाने वह पूरे भारत में केवल किस नहीं बल्कि ग्रामीण नागरिकों के नेता बन सकते थे। भारतीय जनता पार्टी में सभी प्रकार के नेता मौजूद है लेकिन गांव वालों का कोई नेता नहीं है। शिवराज सिंह चौहान यह मौका चूक गए। शिवराज सिंह को नजदीक से जानने वाले, बहुत बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं कि वह केंद्रीय कृषि मंत्री होने के नाते जी राम जी के लिए केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। उन्होंने मन लगाकर काम नहीं किया। लेखक:- उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं पॉलीटिकल एनालिस्ट)।
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