बिना BEd DEd वालों को भी अतिथि शिक्षक नियुक्त किया जा सकता है, स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 फरवरी 2026
: शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत किसी भी सरकारी अथवा प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ने के लिए DEd BEd डिग्री होना अनिवार्य है परंतु मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने बताया है कि, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने के लिए BEd DEd अनिवार्य नहीं है।

80,000 से अधिक सरकारी स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे

विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 80,000 से अधिक सरकारी स्कूल वर्तमान में पूरी तरह अतिथि शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के 1,15,678 पद रिक्त हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।

Guest Teachers Can Be Appointed Without BEd or DEd, Says School Education Minister

विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्पष्ट की:
• मेरिट और स्कोरकार्ड: अतिथि शिक्षकों का आमंत्रण ऑनलाइन काउंसलिंग और ब्लॉक स्तर पर तैयार 'पैनल मेरिट' के आधार पर किया जाता है।
• D.Ed/B.Ed को प्राथमिकता: योग्यता के संबंध में सरकार ने बताया कि स्कोरकार्ड तैयार करते समय D.Ed या B.Ed डिग्री धारकों को 100 अतिरिक्त अंकों का अधिभार (Weightage) दिया जाता है।
• बिना प्रोफेशनल डिग्री के नियुक्ति: सदन में यह स्पष्ट किया गया कि जिनके पास D.Ed/B.Ed नहीं है, उनका भी स्कोरकार्ड जारी होता है और यदि वे मेरिट क्रम में ऊपर आते हैं, तो उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है, हालांकि उन्हें अतिरिक्त अंकों का लाभ नहीं मिलता।

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार वर्ष 2026-27 में 15,000 से अधिक नए शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। इस भर्ती में अतिथि शिक्षकों को 50% आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है, ताकि उनके अनुभवों का लाभ विभाग को मिल सके और उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

विपक्ष के सदस्य भंवर सिंह शेखावत और राजन मंडलोई ने अतिथि शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया:
सदन में बताया गया कि अतिथि शिक्षकों को 3 से 4 महीने तक मानदेय नहीं मिलता, जिससे उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
सरकार ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि अतिथि शिक्षकों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा योजना नहीं है। इसका कारण यह बताया गया कि यह एक "अस्थाई व्यवस्था" (Temporary Arrangement) है जो केवल रिक्त पदों या नियमित शिक्षकों के अवकाश पर जाने के दौरान पठन-पाठन सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।

अतिथि शिक्षकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने 'सार्थक' और 'ई-उपस्थिति' सॉफ्टवेयर लागू किया है। वर्तमान में प्रदेश के 98% अतिथि शिक्षक डिजिटल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

उच्च शिक्षा में अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण के लिए कमेटी गठित

अतिथि विद्वानों के लिए 'हरियाणा मॉडल' उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत 4,017 अतिथि विद्वानों के संबंध में मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि सरकार उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए हरियाणा राज्य की नीति का अध्ययन कर रही है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है जो जल्द ही अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
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