भोपाल के JLN कैंसर अस्पताल में घोटाला और माफिया राज का मामला विधानसभा में गूंजा

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में घोटाला और माफिया राज का मामला, 26 फरवरी को विधानसभा में उठाया गया। विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा सदन को बताया गया की हालत कितनी खराब है और एक अस्पताल में मरीज को किस प्रकार से परेशान किया जा रहा है। कृपया पूरी खबर ध्यानपूर्वक पढ़िए क्योंकि आपको भी ऐसी किसी परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है, तब यह न्यूज़ आपको परिस्थितियों का सामना करने का साहस और रणनीति बनाने की समझ देगी। 

गरीबों के इलाज के लिए हुई है जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल की स्थापना

दस्तावेजों के अनुसार, 90 के दशक में भोपाल के ईदगाह हिल्स क्षेत्र में इस अस्पताल को बहुमूल्य सरकारी जमीन ररयायती दरों पर आवंटित की गई थी। इस आवंटन का मुख्य उद्देश्य भोपाल और प्रदेश के अन्य जिलों के निर्धन परिवारों, कैंसर पीड़ितों और भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को रियायती और उचित उपचार उपलब्ध कराना था। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह पट्टा 28 जनवरी 1994 को मध्य प्रदेश कैंसर अस्पताल एवं सेवा समिति, भोपाल के नाम जारी किया गया था।

Mafia Raj Allegations at JLN Cancer Hospital Raised in Assembly

विधानसभा में चर्चा के दौरान अस्पताल के प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई गईं:
सदन में यह मुद्दा उठाया गया कि अस्पताल की संचालन समिति में सरकारी नियमों के विपरीत डॉक्टरों और जनसेवकों के बजाय 'दवा माफियाओं' का प्रभाव बढ़ गया है। यह आरोप भी लगाया गया कि अस्पताल परिसर के भीतर अवैध रूप से निर्माण कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कैंसर पीड़ितों के बजाय अन्य व्यावसायिक लाभ वाले मरीजों का उपचार करना है।

विधायक सबनानी ने सवाल किया कि क्या यह अस्पताल उन शर्तों का पालन कर रहा है जिनके आधार पर उसे रियायती जमीन दी गई थी, विशेषकर गैस पीड़ितों को सस्ती दवाइयाँ और इलाज उपलब्ध कराने के मामले में।

सरकार का पक्ष और वर्तमान स्थिति

सरकार की ओर से दिए गए उत्तर में निम्नलिखित स्पष्टीकरण दिए गए:
सरकार ने स्पष्ट किया कि जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एक निजी संस्थान है और इसका संचालन एक समिति द्वारा किया जाता है। गैस राहत विभाग द्वारा इस अस्पताल को गैस पीड़ित कैंसर रोगियों के इलाज के लिए मान्यता दी गई है। अस्पताल की संचालन समिति ही इसके कार्यों का पर्यवेक्षण करती है, हालांकि रियायती दरों पर उपचार और आवंटन की शर्तों के उल्लंघन की शिकायतों पर स्पष्ट प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण अभी तक नहीं मिला है।

निष्कर्ष: विधानसभा में हुई इस चर्चा ने स्पष्ट किया कि ईदगाह हिल्स स्थित यह अस्पताल, जो गैस पीड़ितों की सेवा के लिए स्थापित किया गया था, वर्तमान में प्रबंधन के विवादों और शर्तों के उल्लंघन के आरोपों से घिरा हुआ है। सदन में इन अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कार्रवाई का आश्वासन तक नहीं दिया गया है।
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