भोपाल समाचार, 10 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल का आयुक्त उस समय बदल दिया गया, जब लगभग डेढ़ लाख शिक्षक विशेष पात्रता परीक्षा के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और नया शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है। अभिषेक सिंह और शिल्पा गुप्ता के बीच में बड़ा अंतर है। अभिषेक सिंह ने घाट-घाट का पानी पिया है। इसलिए देखना रोचक होगा कि मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा का भविष्य क्या होगा।
MP School Education in Transition: Will New Leadership Bring Major Reforms?
कोई भी अवधारणा बना लेने से पहले श्री अभिषेक सिंह के बारे में जान लेना बहुत जरूरी है। सबसे बड़ी बात है कि श्री अभिषेक सिंह उत्तर प्रदेश से आते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी नहीं है। यानी इंटरनेट पर जो आपको उत्तर प्रदेश कैडर के अभिषेक सिंह की कहानी पढ़ने को मिलती है, वह अलग है। इन्होंने हिंदी में बी.ए. और पी.जी. (डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय) तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी बी.ए. की पढ़ाई की है और हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रवीण हैं। मध्य प्रदेश में असिस्टेंट कलेक्टर (छिंदवाड़ा), एसडीओ (मुरैना, इंदौर), जिला पंचायत सीईओ (देवास), खंडवा के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (2017-2021), प्लानिंग विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी, स्टेट इलेक्शन कमीशन में ओएसडी/सेक्रेटरी और गृह विभाग के सचिव रह चुके हैं।
श्री अभिषेक सिंह ने शिवराज सिंह शासनकाल में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उनकी कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन या सरकार बदलने के बावजूद उन्हें हमेशा महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। गृह विभाग (Home Department) जैसे संवेदनशील विभाग में सचिव रहना और अब लोक शिक्षण (DPI) जैसे बड़े विभाग की कमान मिलना यह दर्शाता है कि राजनीतिक नेतृत्व को उनकी प्रशासनिक क्षमता पर भरोसा है।
संक्षेप में कहें तो, वे एक ऐसे अधिकारी माने जाते हैं जो "लो-प्रोफाइल" रहकर काम करना पसंद करते हैं और राजनेताओं के साथ अनावश्यक टकराव से बचते हुए प्रशासनिक गरिमा बनाए रखते हैं लेकिन प्रॉब्लम यह है कि मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग, राजनीति का एक बड़ा स्टेडियम है। लोक शिक्षण संचल्लाल है कि आयुक्त को भाजपा के जिला अध्यक्ष से लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री तक सब का प्रेशर हैंडल करना होता है। या भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा भी है। अतिथि शिक्षकों के वेतन से लेकर डिपार्टमेंट में होने वाली सभी प्रकार की खरीदी में भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसी स्थिति में श्री अभिषेक सिंह, क्या और कैसे कर पाएंगे, यह अपने आप में बड़ा सवाल है क्योंकि श्री अभिषेक सिंह के करियर में इतनी पावरफुल पोस्टिंग इससे पहले कभी नहीं हुई।
मध्य प्रदेश के पुराने शिक्षकों की विशेष पात्रता परीक्षा का क्या होगा
8 अप्रैल को मध्य प्रदेश के पुराने शिक्षकों ने जिला स्तर पर प्रदर्शन करके जबरदस्त माहौल बनाया और सरकार के ऊपर एक प्रेशर क्रिएट किया। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाना है या नहीं यह फैसला सरकार का होगा लेकिन सब जानते हैं कि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह इसके पक्ष में नहीं है और अब आयुक्त के पद पर श्री अभिषेक सिंह आ गए हैं जो आदेश और नियमों का पालन करना पसंद करते हैं। जो अपने अधीन कर्मचारियों में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करते। तो फिर आंदोलन और स्कूलों की तालाबंदी कैसे बर्दाश्त करेंगे।

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