मध्य प्रदेश पंचायत विभाग के 5000 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त, मुख्यमंत्री मानदेय बढ़ाना चाहते थे

Updesh Awasthee
भोपाल, 18 मई 2026:
मध्य प्रदेश की आदिवासी बहुल 5254 ग्राम पंचायत में शिवराज सिंह सरकार के समय अस्थाई तौर पर नियुक्त किए गए 5000 कर्मचारी, नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मानदेय दोगुना करना चाहते थे। घोषणा भी कर दी थी लेकिन मध्य प्रदेश पंचायत राज संचालनालय ने सबकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। 

Madhya Pradesh Panchayat Department Terminates 5,000 Employees

पिछले दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने कार्यभारित और आकस्मिक निधि वाले 1.20 लाख रिक्त पदों को डाइंग कैडर घोषित कर दिया था। इन पदों पर बहुत न्यूनतम मानदेय में कर्मचारियों की अस्थाई नियुक्ति की जाती थी। शिवराज सिंह सरकार के समय मध्य प्रदेश की 5254 ग्राम पंचायतों में पेसा एक्ट लागू होने के बाद ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और सरकारी योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने के लिए पेसा मोबिलाइजर्स की नियुक्ति की गई थी। इनको केवल ₹4000 मानदेय दिया जाता था। जब 2023 के चुनाव आए तो अन्य अस्थाई कर्मचारियों की तरह पैसा मोबिलाइजर्स ने भी नियमितीकरण की मांग की। 

योजना ही खत्म हो गई 

पैसा मोबिलाइजर्स को आश्वासन दिया गया था कि उनका मानदेय ₹4000 से बढ़ाकर ₹8000 कर दिया जाएगा। मानदेय बढ़ाने के आदेश तो जारी नहीं हुई लेकिन सरकार द्वारा डाइंग कैडर घोषित करने के बाद पंचायत राज संचालनालय द्वारा सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को एक पत्र भेजा गया है। इसमें लिखा है कि, भारत सरकार की आरजीएसए (संशोधित) योजना 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावशील थी। इसी योजना के बजट मद से पेसा मोबिलाइजर्स को मानदेय दिया जाता था। 

पत्र में उल्लेख किया गया है कि योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और इसके नए स्वरूप को लेकर केंद्र सरकार स्तर पर अभी नीति निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से चयनित ग्राम सभा मोबिलाइजर्स की सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है। इसलिए संबंधित ग्राम पंचायतों को उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

इन जिलों में प्रभावित होंगे कर्मचारी

यह आदेश विशेष रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, मंडला, डिंडोरी, अनुपपुर, धार, खरगोन, रतलाम, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सीधी, शहडोल, उमरिया और श्योपुर सहित पेसा एक्ट के दायरे में आने वाले जिलों के लिए जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री तो मानदेय बढ़ना चाहते थे

मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अक्टूबर 2024 में सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पेसा मोबिलाइजर्स का मानदेय 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 8 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाएगा। उस समय करीब 4665 पेसा मोबिलाइजर्स सेवाएं दे रहे थे, लेकिन बाद में केंद्र सरकार से फंड नहीं मिलने के कारण यह निर्णय लागू नहीं हो सका।

आदिवासी ग्राम पंचायत के लिए लागू हुआ था पेसा एक्ट

मध्यप्रदेश में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। 15 नवंबर 2022 को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू की मौजूदगी में शहडोल से इसका औपचारिक शुभारंभ किया गया था।प्रदेश के 20 जिलों के 89 विकासखंडों की 5254 पंचायतों और 11757 गांवों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। इस कानून के तहत आदिवासी क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार दिए गए हैं।

पेसा मोबिलाइजर्स की नियुक्ति क्यों की गई थी

पेसा मोबिलाइजर्स की भूमिका जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने, ग्रामीणों को पेसा एक्ट के अधिकारों के प्रति जागरूक करने और ग्राम सभाओं के आयोजन में सहयोग करने की होती है। इसके अलावा गांवों में छोटे-मोटे विवादों को सुलझाने और सरकारी संदेशों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने का कार्य भी इन्हीं के जिम्मे होता था। इन शॉर्ट आदिवासी ग्रामीणों को पेसा एक्ट के बारे में जानकारी देने के लिए पैसा मोबिलाइजर्स की नियुक्ति की गई थी। उम्मीद थी की योजना आगे भी लागू रहेगी परंतु केंद्र सरकार द्वारा बंद कर दी गई।

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