MP Transfer Policy 2026 में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइन, जानें कब से शुरू होंगे ट्रांसफर

Updesh Awasthee
भोपाल, 14 मई 2026
: Madhya Pradesh Transfer Policy 2026 - मध्य प्रदेश सरकार, राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए MP Transfer Policy 2026 को अंतिम रूप देने में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की मंशा के अनुरूप, तबादलों की प्रक्रिया संभवतः 20 मई या उसके आसपास शुरू की जा सकती है। इस बार नीति में कई नए पैरामीटर जोड़े जा रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाया जा सके। शासन की कोशिश है कि तबादलों के कारण शासकीय सेवकों और उनके परिवारों पर कोई अनावश्यक दबाव न आए।

MP New Transfer Policy: अब ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह बंद 

इस बार की नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि तबादलों में ऑफलाइन प्रक्रिया के लिए कोई जगह नहीं होगी। बीते वर्षों की कमियों को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होंगे। विभागीय मंत्रियों द्वारा की जाने वाली सिफारिशें भी तब तक मान्य नहीं होंगी, जब तक वे ऑनलाइन माध्यम से न भेजी जाएं। पिछले साल कई विभागों ने ऑनलाइन नियमों का ठीक से पालन नहीं किया था, जिससे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को डेटा जुटाने में कठिनाई हुई थी, जिसे इस बार सख्ती से सुधारा जा रहा है।

पारदर्शिता के लिए नया फीडबैक सिस्टम और सिफारिशों की जांच 

MP Transfer Policy 2026 के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक फीडबैक सिस्टम लागू कर सकती है। इसके माध्यम से तबादला पा चुके कर्मचारियों से पूछा जाएगा कि उन्हें प्रक्रिया के दौरान किसी कठिनाई का सामना तो नहीं करना पड़ा। इसके अलावा, अब जनप्रतिनिधि थोकबंद सिफारिशें नहीं कर सकेंगे; ऐसी सिफारिशों की गहन पड़ताल की जाएगी। विभाग प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि किसी भी विभाग में 10 से 20 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का तबादला न हो और कार्य प्रभावित न हो।

MP सरकारी कर्मचारी तबादला प्राथमिकताएं: 

पति-पत्नी और दिव्यांगों को मिलेगी वरीयता नई नीति में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पति-पत्नी (शासकीय सेवक) के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उन्हें एक ही स्थान पर सेवा देने का अवसर मिल सके। इसके अलावा, दिव्यांग शासकीय सेवकों को तबादलों में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों या उनके परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए भी तबादलों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लिए जाएंगे।

विभागीय और प्रभारी मंत्रियों के अधिकारों का निर्धारण तबादला प्रक्रिया में शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। विभागीय मंत्री एक से दूसरे जिले में होने वाले तबादलों (Inter-District) पर निर्णय लेंगे और अपनी सिफारिशें ऑनलाइन भेजेंगे। 
वहीं, प्रभारी मंत्री जिले के भीतर (Intra-District) होने वाले तबादलों के आवेदनों पर फैसला करेंगे। प्रभारी मंत्रियों को आवेदनों की जांच करने और कर्मचारी की पिछली 'हिस्ट्री' देखने के अधिकार भी दिए गए हैं। 
विभाग प्रमुख यह भी सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी ऑफिस में 50 प्रतिशत से अधिक नए कर्मचारी न आएं, जिससे कामकाज की निरंतरता बनी रहे।

आपत्तियों की सुनवाई 
बीते साल की तुलना में इस बार तबादला प्रक्रिया की समय अवधि 10 दिन कम हो सकती है। पिछले साल यह प्रक्रिया 1 मई से शुरू होकर 14 जून तक खिंच गई थी। हालांकि, तबादलों से असंतुष्ट कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और सुनवाई के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इन नवाचारों का उद्देश्य जनता और शासकीय सेवक दोनों को लाभ पहुंचाना है।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!