भोपाल, 13 मई 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में आ गई है। यह समाचार उनके लिए वज्रपात के समान है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है की पात्रता परीक्षा पास किए बिना कोई भी व्यक्ति शिक्षक नहीं बन सकता। जिसको जितनी छूट मिलती थी मिल चुकी, अब कोई समझौता नहीं होगा।
Supreme Court Shock for 1.5 Lakh MP Teachers, TET Qualification Mandatory
सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार के साथ शिक्षकों की कई संगठनों द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। निवेदन किया गया था कि जो शिक्षक लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कक्षाओं के रिजल्ट भी अच्छे आ रहे हैं। ऐसे सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा की शर्त से मुक्त कर देना चाहिए। याचिकाओं में 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से छूट देने की मांग की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2017 में जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था, तब इन शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए 5 साल का समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा तय किए गए नियमों का पालन सभी राज्यों और शिक्षकों को करना होगा।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और अधिवक्ताओं की ओर से विभिन्न दलीलें पेश की गईं। 70 से अधिक याचिकाओं पर बुधवार शाम तक सुनवाई जारी रही। जनजातीय कल्याण शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा- हमारे संगठन ने भी एक याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान वह खुद मौजूद थे। अधिवक्ताओं के मजबूत तर्कों के बावजूद कोर्ट का रुख सकारात्मक नहीं लगा।
दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 1998 से 2009 के बीच बिना टीईटी नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए थे। ये नियुक्तियां राज्य सरकार की मेरिट प्रक्रिया के तहत हुई थीं। मध्य प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब डेढ़ लाख बताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- परीक्षा में फेल हुए तो नौकरी जा सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि यदि कोई शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आदेश जारी होने पर प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था।
शिक्षक संगठनों ने फैसले के खिलाफ आंदोलन भी किया। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर पुनर्विचार की मांग की। पिछले महीने मध्य प्रदेश सरकार, शासकीय शिक्षक संगठन, राज्य कर्मचारी संघ और कई शिक्षा संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी।

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