जनगणना ड्यूटी के खिलाफ खुराफाती कर्मचारी के 4 कुतर्कों का पोस्टमार्टम

Updesh Awasthee
भोपाल, 7 मई 2026
: जनगणना ड्यूटी से बचने के लिए पूरे भारत में सरकारी कर्मचारियों द्वारा कई प्रकार के बहाने बनाए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ दिया गया। 500 आवेदन में 130 प्रकार के बहाने थे। वेरिफिकेशन में पाया गया कि कर्मचारी झूठ बोल रहा था। इसके बाद भी कर्मचारी जनगणना ड्यूटी के खिलाफ लगातार की कुतर्क दे रहे हैं। एक विद्वान कर्मचारियों ने जनगणना ड्यूटी के खिलाफ 4 को कुतर्कों को सोशल मीडिया पर वायरल किया है। चलिए उनका पोस्टमार्टम करते हैं। 

Case 1
एक कर्मचारी को 745 मकान की जिम्मेदारी दे दी गई अब उसकी परेशानी सुनने वाला कोई नही है जबकी नियमानुसार 200 घर से अधिक का काम नहीं दिया जा सकता। 
परेशानी सुनने वाला कोई क्यों नहीं है। मध्य प्रदेश में कर्मचारी, एक ऐसा समुदाय है जो सरकार को हिला देता है। आपके संगठन और कर्मचारियों के नेता क्या कर रहे हैं। आपकी सुनवाई क्यों नहीं कर रहे हैं, और फिर मध्य प्रदेश में तो हाई कोर्ट के माध्यम से पटवारी भी कलेक्टर की घंटी बजा देता है। देखिए ना आपके पास कितना टाइम है, 745 मकान की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी सोशल मीडिया पर पूरी तरह से एक्टिव हैं। 

मामला 2 
एक कर्मचारी को कार्य करते समय असामाजिक तत्व परेशान करने लगे चार्ज अधिकारी को कॉल किया कार्यालय और प्रभारी अधिकारी सिर्फ फोन कॉल पर परामर्श देते रहे कोई मौके पर नहीं गया। संबंधित अधिकारी का तर्क था कि सुरक्षा देना हमारा काम नहीं। 
तो आप क्या चाहते हैं, चार्ज अधिकारी शक्तिमान की तरह उड़कर आपके पास आ जाए और आपकी रक्षा करें। बात सही है, सुरक्षा देना चार्ज अधिकारी का काम नहीं है, पुलिस का काम है। जब असामाजिक तत्व परेशान कर रहे हैं तो पुलिस का नंबर डायल 122 करना चाहिए। देखना, चार्ज अधिकारी का विरोध करने के चक्कर में कहीं जनगणना अधिनियम के तहत मामला दर्ज न हो जाए।

केस 3
एक कर्मचारी काम करता समय गाड़ी से गिरकर घायल हो गया। जिसके बाद वह चलने में असमर्थ था। अधिकारी, संबंधित कर्मचारी से बोले मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र लाओ, वह सिवनी का कर्मचारी अकेला जबलपुर में रहता था, घायल व्यक्ति आराम करे या मेडिकल बोर्ड के चक्कर लगाए। 
कर्मचारी का एक्सीडेंट हो गया, चलने में असमर्थ है, इसके बाद भी उसके घर वाले नहीं आए। कोई पास पड़ोसी भी मदद नहीं करता, बिल्कुल अकेला है। समझ रहे हो ना गोविंद, आदमी इतना खराब है कि किसी के साथ भी इसका व्यवहार अच्छा नहीं है। व्यवहार अच्छा होता तो इसका साथी कर्मचारी, इसकी मदद कर रहा होता है। 
 
Case 4
एक महिला कर्मचारी को जनगणना से रोका गया और अभद्रता हुई। शिक़ायत हुई अधिकारी बोले जाओ हमने पुलिस को बोल दिया है अब नहीं होगा। अगले दिन फिर वही हुआ। अब अधिकारी बोल रहे आप गए क्यों थे किसने कहा वहा जाने। 
काल्पनिक कहानी है, यदि किसी व्यक्ति ने किसी महिला कर्मचारी को जनगणना करने से रोका और अभद्रता हुई है, तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, जनगणना अधिनियम और महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला दर्ज होता है। अभी भी हो सकता है इसके लिए सरकारी परमिशन की जरूरत नहीं है। यदि अधिकारी मदद नहीं कर रहा तो पत्रकार करेंगे। किसी भी नजदीकी पत्रकार से संपर्क कीजिए। 

दरअसल, यह चारों मामले एक मक्कार कर्मचारी के खुराफाति दिमाग की उपज है। इस प्रकार के लोग ना तो काम करते हैं और ना ही नेतृत्व करते हैं। समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों की मदद भी नहीं करते। बस आग भड़काने का काम करते रहते हैं। इसके पीछे इनका कोई उद्देश्य भी नहीं होता, बस आनंद आता है। समाज के हर वर्ग में इस प्रकार के विद्वान मानव मौजूद हैं। इनकी पहचान करने और इनको इग्नोर करने की जरूरत है। लेखक: मुकेश कुमार, अतिथि शिक्षक।
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