शिल्पा गुप्ता IAS के सताए शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत मिली, 100% वेतन के साथ पदस्थापना का आदेश

Updesh Awasthee
जबलपुर, 02 मई 2026
: भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी एवं लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल की तत्कालीन आयुक्त श्रीमती शिल्पा गुप्ता द्वारा सताए गए शिक्षकों को अंततः हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने शिक्षकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। इस मामले में श्रीमती शिल्पा गुप्ता के खिलाफ वारंट भी जारी हुआ था।

Alleged Harassment Case: High Court Grants Relief to Teachers Against IAS Shilpa Gupta

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग की शालाओ में डी.पी.आई द्वारा की गई संयुक्त काउंसलिंग के कारण प्राथमिक शिक्षकों की भर्तियों में में आरक्षण नियमों की अनदेखी करके आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों (ओ.बी.सी./एस.सी./एस.टी. तथा EWS) को उनकी चॉइस की शालाओं में पदस्थापना न करके जन जाति कार्य विभाग की शालाओ में उनके निवास से 400 से 900 किलोमीटर दूर पदस्थापना दी गई जबकि आरक्षित वर्ग के कम अंक वाले अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले की शालाओ में पदस्थापना दी गई। डी.पी.आई के उक्त अवैधानिकता को हाईकोर्ट में आर.पी.एस.ला एसोसिएट के माध्यम से याचिकाए दायर कर चुनोती दी गई। 

हाईकोर्ट की डिविजन बैंच द्वारा डी.पी.आई के उक्त कृत्य को असंवैधानिक करार कर 30 दिनों के अन्दर याचिकाकर्ताओ को (आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान) जनजातीय कार्य विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में उनकी पसंद के जिला की शालाओं में पदस्थापना दिए जाने का आदेश पारित किया गया था। हाईकोर्ट के उक्त आदेश की गलत व्याख्या कर डी.पी.आई. की तत्कालीन आयुक्त श्रीमती शिल्पा गुप्ता के निर्देशन में संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग में नए सिरे से 70% वेतनमान पर तीन साल की परीवीक्षा के पदस्थापना आदेश 12.6.25 को जारी करा दिए गए तथा 15 दिवस के अन्दर जॉइनिंग का समय दिया गया। 

याचिकाकर्ताओ द्वारा डी.पी.आई द्वारा जारी कराए उक्त समस्त आदेशो को हाईकोर्ट में पुनः चुनौती दी गई। हाईकोर्ट की डिविजन बैंच के जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ द्वारा उक्त आदेशों को प्रथम दृष्टया असंवैधानिक मानते हुए डी.पी.आई को निर्देशित किया गया कि याचिका कर्ताओ की जनजातीय कार्य विभाग की सम्पूर्ण सेवा अवधि को जोड़कर 100% वेतनमान पर नियुक्ति पाने के अधिकारी है। याचिकाकर्ताओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अभिलाषा लोधी, काजल विश्वकर्मा ने पैरवी की। 

प्रकरण की हिस्ट्री : 
याचिकाकर्ताओं द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक WP/34360/2024 दायर की गई थी, उक्त याचिका को माननीय उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच द्वारा दिनांक 02.12.2024 को आदेश पारित कर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील क्रमांक 7663/21 प्रवीण कुमार कुर्मी विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य में पारित आदेश दिनांक 24.02.22 तथा उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा WA/1333/2023 ऋचा ताम्रकार एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य में पारित आदेशों के रेशियो को दृष्टिगत रखते हुए, डी.पी.आई. को विधिवत आरक्षण कानून का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, तथा उक्त याचिका स्वीकार की गई थी एवं संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून (Ratio Decidendi) से precedent तय हुआ कि याचिकाकर्ताओं को उनकी च्वॉइस फिलिंग के अनुसार ट्राइबल विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में सीनियरिटी एवं वेतनमान सहित समस्त सुसंगत लाभ देने का 30 दिनों के अंदर आदेश जारी किया जाए।

लेकिन निर्धारित समय सीमा 30 में कमिश्नर डी.पी.आई. द्वारा आदेश जारी नहीं किए गए, जिसके कारण कई अभ्यर्थियों द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में तत्कालीन कमिश्नर श्रीमती शिल्पा गुप्ता के विरुद्ध अवमानना याचिकाएं दाखिल की गईं।

हाईकोर्ट के नोटिस के बावजूद भी हाईकोर्ट में कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई न ही शिल्पा गुप्ता उपस्थित हुईं, तब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने श्रीमती शिल्पा गुप्ता के विरुद्ध दस हजार रु. का जमानतीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

तब उन्होंने बिना सक्षम स्वीकृति तथा विधि विभाग की अनुमति के ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में SLP(c)s डायरी क्रमांक 13542/25, 13954/25 दाखिल कीं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने प्रथम सुनवाई पर ही उक्त समस्त याचिकाएं खारिज कर उच्च न्यायालय के well-reasoned आदेशों की पुष्टि की।

याचिकाकर्ताओं द्वारा डी.पी.आई के समक्ष दिनांक 19/06/25 को अभ्यावेदन देकर आदेश दिनांक 16/5/25 में सुधार करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन तत्कालीन कमिश्नर महोदया श्रीमती शिल्पा गुप्ता द्वारा कहा गया कि आप लोगों द्वारा मेरे विरुद्ध अवमानना याचिका दाखिल करके वारंट जारी करवाते हो, मैं उक्त आदेश में कोई संशोधन नहीं करूँगी।

तथा श्रीमती शिल्पा गुप्ता द्वारा यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ताओं को वरिष्ठता प्रदान करने तथा ट्राइबल विभाग में की गई सेवाओं को जोड़ने का आदेश पारित नहीं किया गया है।
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