प्रयागराज, 05 मई 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'Hon'ble' (माननीय) संबोधन के संबंध में निर्धारित प्रोटोकॉल के लिए दाखिल की गई एक याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि, किसी भी राज्य अथवा केंद्र के, कितने भी वरिष्ठ पद पर बैठे हुए अधिकारी को 'Hon'ble' (माननीय) संबोधन नहीं दिया जा सकता। यह संबोधन केवल संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए निर्धारित है। इसी के साथ स्पष्ट हो गया कि माननीय संबोधन किसके नाम के साथ लगा सकते हैं और किसके नाम के साथ नहीं लगा सकते।
Who gets to be called 'Hon’ble' in India
यह विषय हर्षित शर्मा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। दरअसल, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद श्री अनुराग ठाकुर के नाम के साथ 'Hon'ble' (माननीय) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के गृह सचिव से इस "प्रोटोकॉल चूक" (Protocol lapse) पर स्पष्टीकरण मांगा था।
किसे है 'Hon'ble' संबोधन का अधिकार?
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह सम्मान उन संवैधानिक पदाधिकारियों (Constitutional Functionaries) को दिया जाता है जो सरकार के तीन अंगों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) में से किसी एक के संप्रभु कार्यों (Sovereign functions) का निर्वहन करते हैं। कोर्ट के अनुसार निम्नलिखित व्यक्ति इस सम्मानजनक संबोधन के हकदार हैं:
- केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्री।
- सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीश।
- लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष एवं सभापति, और राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष।
- संसद सदस्य (MPs) और राज्य विधानसभाओं के सदस्य (MLAs)।
सिविल सेवकों के लिए निर्देश कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि सिविल सेवा के अधिकारी (Civil Servants), चाहे वे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हों, अपने नाम के साथ 'Hon'ble' संबोधन का उपयोग करने के हकदार नहीं हैं, क्योंकि वे किसी संप्रभु संवैधानिक पद के धारक नहीं होते हैं।
व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से ऊपर है प्रोटोकॉल
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि "व्यक्तिगत असंतोष (Personal disgruntlement) या किसी परिवार के साथ जान-पहचान" के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी के सम्मान को कम नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति प्रोटोकॉल के अनुसार इस संबोधन का हकदार है, तो किसी भी संचार (Communication) में उसे उसी प्रकार संबोधित किया जाना चाहिए।
conclusion: Hon’ble Title Usage in India: Who Can Be Addressed as Hon’ble and Who Cannot
मामले की सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया कि FIR दर्ज कराने वाले व्यक्ति (खजान सिंह) को सांसदों या पूर्व मंत्रियों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लेते हुए इस विशिष्ट मुद्दे पर कार्यवाही बंद कर दी है। उल्लेखनीय है कि श्री अनुराग ठाकुर इस आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं, बल्कि उनका नाम केवल संदर्भ के रूप में FIR में आया था।
इस आदेश के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक और सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी है।

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