भोपाल, 23 मई 2026: पद का दुरुपयोग करके प्रॉपर्टी में करोड़ों का फायदा उठाने के मामले में भाजपा नेता, उज्जैन के पूर्व सांसद और रतलाम की आलोट विधानसभा से विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय लगातार हेडलाइंस में है। सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना मामला वायरल हो रहा है। इसमें बताया जा रहा है कि आलोट विधानसभा में सरकार की कायाकल्प योजना 2.0 से विधायक महोदय ने करोड़ों का फायदा उठाया है।
BJP MLA Chintamani Malviya Accused of Earning Crores Through Kayakalp Yojana
मामला आलोट नगर परिषद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का नाम श्री संजय जैन है। पूरे मामले की शिकायत मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, कलेक्टर और लोकायुक्त पुलिस से की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जिसके चलते शिकायतकर्ता ने अब हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका लगाने की तैयारी कर ली है। याचिका में मामले की जांच ईओडब्ल्यू या लोकायुक्त से कराने की मांग भी की गई है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शहरों में सीमेंट-कांक्रीट सड़कें बनाने के लिए कायाकल्प अभियान 2.0 शुरू किया था। योजना की शर्त थी कि सड़कें केवल नगरीय सीमा में ही बनेंगी। इसके बावजूद 23 फरवरी 2024 को नगर परिषद ने महादेव मंदिर से आगर-बड़ौद लिंक रोड तक सड़क निर्माण को मंजूरी दे दी। शिकायतकर्ता श्री संजय जैन का दावा है कि यह क्षेत्र धरोला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। इसके लिए शासन ने 1 करोड़ रु. भी स्वीकृत किए। यह भी बताया है कि सड़क निर्माण की जमीन नगर परिषद की है, जबकि उसके आसपास विधायक और करीबियों की जमीन है।
सड़क बनते ही कृषि भूमि से प्लॉट की पैदावार
शिकायतकर्ता संजय जैन के मुताबिक, महादेव मंदिर से आगर-बड़ौद लिंक रोड को 23 फरवरी 2024 को मंजूरी मिली। 27 दिसंबर 2024 को विधायक चिंतामणि मालवीय ने सड़क किनारे 0.0744 हेक्टेयर जमीन खरीदी। इसके अलावा एक अन्य खसरे में मालवीय की हिस्सेदारी है।
(क्या इसका मतलब यह हुआ कि विधायक ने अपने करीबियों को गोपनीय जानकारी दी और जमीन खरीदने के लिए प्रेरित किया। अपनी पावर का उपयोग करके करोड़ों का मुनाफा करवाने के बदले में, विधायक महोदय ने जमीन में हिस्सेदारी ली?)
Date Line देखिए सब समझ में आ जाएगा
शिकायत के मुताबिक इस इलाके में विधायक और उनके करीबियों के पास कुल 13.168 हेक्टेयर जमीन है। सड़क निर्माण को मंजूरी फरवरी 2024 में मिली, जमीन की रजिस्ट्री दिसंबर 2024 में हुई और सड़क का निर्माण 2025 में किया गया।
सड़क बनते ही जमीन के दाम डबल हो गए
शिकायतकर्ता का दावा है कि सड़क बनने के बाद आसपास की जमीनों की कीमत कई गुना बढ़ गई है और यहां प्लॉटिंग शुरू हो गई है। धरोला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनी इस 980 मीटर लंबी सड़क पर 1 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क बनने से पहले जमीन की कीमत 50-60 लाख रुपए प्रति एकड़ थी, जो अब बढ़कर 1.25 से 1.50 करोड़ रुपए प्रति एकड़ तक पहुंच गई है।
भोपाल वाले अधिकारी भी शामिल हैं?
सीताराम चौहान, सीएमओ, आलोट के बयान से लगता है कि इस मामले में राजधानी भोपाल के अधिकारी भी शामिल है। सीएमओ चौहान का कहना है कि, कायाकल्प योजना के तहत जो सड़क बनी है, वह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में है। ये क्षेत्र आलोट नगर से 500 मीटर दूर है। सड़क का प्रस्ताव नगर परिषद ने नहीं बनाया था। ये नगरीय विकास एवं आवास विभाग से आया था, जिसे पीआईसी ने मंजूर किया।
विधायक महोदय का गोलमोल जवाब
जब पत्रकारों ने विधायक महोदय से यह सवाल किया तो, उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। उनका जवाब ही उन्हें संदिग्ध बनता है। सवाल था कि आपने पहले हो प्रॉपर्टी अच्छी, फिर योजना में छेड़छाड़ करवाई, परियोजना को भोपाल से मंजूर करवाया, फिर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाई, और इस जानकारी को दूसरे लोगों के बीच में शेयर करने के बदले में आपने कमीशन के तौर पर प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी ली। इस प्रकार अपने पद की गोपनीयता और संविधान की शपथ का उल्लंघन किया है।
डॉक्टर चिंतामणि मालवीय, विधायक, आलोट ने इस प्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि, कायाकल्प योजना में बनी सड़क नगरीय सीमा में है। मैं यहां का विधायक हूं, इसलिए यहां प्लॉट लेना स्वाभाविक है। वहां और किसकी जमीन है, इसकी जानकारी नहीं है। मैंने विधानसभा क्षेत्र में 70 सड़कों की मांग की है। मुझे किसी शिकायत की जानकारी नहीं है।'

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