विधानसभा में झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी क्लीनिकों का मुद्दा गूंजा

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश विधानसभा में 26 फरवरी को एक बार फिर झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी क्लिनिको का मामला उठाया गया। विधायकों ने एक बार फिर सरकार को असली स्थिति के बारे में बताया। यह भी बताया कि CMHO किसी फर्जी क्लिनिक को बंद करते हैं तो कुछ दिनों बाद वह क्लिनिक खुल जाता है और फिर CMHO कुछ नहीं करते।

Quack Doctors Issue Raised in Assembly 

डॉक्टरों के अभाव में 'बंगाली झोलाछाप' डॉक्टरों का बोलबाला सैलाना (रतलाम) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सदन में गंभीर आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के सरवन, रावटी और बाजना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी है। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण मरीज मजबूर होकर 'झोलाछाप बंगाली' डॉक्टरों के पास जाते हैं। विधायक ने दावा किया कि ये झोलाछाप डॉक्टर न केवल मोटी फीस वसूल रहे हैं, बल्कि उनके गलत और अनुचित उपचार के कारण मरीजों की मौत भी हो रही है।

श्री राम अभिलाष द्विवेदी का फर्जी क्लिनिक फिर से चालू मिला

बंद कराने के बाद फिर खुला फर्जी क्लीनिक अनूपपुर जिले के जैतहरी नगर में फर्जी क्लीनिक के संचालन का मामला विधायक शिवनारायण सिंह ने उठाया। विधायक ने श्री राम अभिलाष द्विवेदी नामक व्यक्ति का नाम लिया, जो जैतहरी के वार्ड नंबर 09 में बिना किसी वैध डिग्री या पंजीयन के क्लीनिक चला रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने 24 सितंबर 2024 को इसे बंद करने का नोटिस दिया था, लेकिन यह फिर से संचालित पाया गया। सरकार ने स्वीकार किया कि 16 फरवरी 2026 को किए गए औचक निरीक्षण में यह क्लीनिक दोबारा चलता मिला, जिस पर अब पुनः कार्रवाई की जा रही है। 

छतरपुर कांड में मंत्री ने कहा CMHO जिम्मेदार

झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से हुई मौतें छतरपुर की विधायक श्रीमती ललिता यादव ने जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा। सरकार ने उत्तर में स्वीकार किया कि कायालय पुलिस अधीक्षक, छतरपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज से मरीजों की मृत्यु होने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि जिले में अपंजीकृत संस्थानों और गैर-अहाताधारी डॉक्टरों पर कार्रवाई करने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पूर्णतः जवाबदेह हैं। 

मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रोपैथी पद्धति को कोई मान्यता नहीं

'अमान्य' चिकित्सा पद्धति पर विवाद विधायक राजन मण्डलोई ने प्रदेश में इलेक्ट्रोपैथी पद्धति से इलाज और इसके कारण हो रही मौतों का मुद्दा उठाया।  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रोपैथी पद्धति को कोई मान्यता नहीं दी गई है और न ही इस पद्धति के किसी कोर्स को मेडिकल कॉलेजों में चलाने की अनुमति है। चर्चा के दौरान खंडवा में इलेक्ट्रोपैथी इलाज से हुई एक मौत और उसके बाद हुई छापामार कार्रवाई का संदर्भ भी आया, हालांकि विभाग ने आधिकारिक रूप से इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रक्रियाधीन बताई।

कटनी मेडिकल कॉलेज पर प्रभाव विधानसभा में चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि सुनील कपूर नामक व्यक्ति, जिस पर राजस्थान में फर्जी डिग्री देने का मामला दर्ज है, उसे मध्य प्रदेश में कटनी सहित 4 मेडिकल कॉलेजों (पीपीपी मोड) का काम मिला था। इस फर्जीवाड़े के कारण कटनी के मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन कार्यक्रम भी प्रभावित हुआ। 

निष्कर्ष: सदन में हुई इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि प्रदेश के सुदूर अंचलों में झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी क्लीनिक एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि 'मध्य प्रदेश उपचर्या गृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम' के तहत ऐसे अवैध संस्थानों और अयोग्य डॉक्टरों के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जाएगी।
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