पुराने शिक्षकों के लिए बुरी खबर: सुप्रीम कोर्ट में TET के खिलाफ दूसरी याचिका भी खारिज

Updesh Awasthee
SC Rejects 2nd TET Plea
भोपाल समाचार, 14 अप्रैल 2026:
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के बयान से सहमत होकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का विचार करने वाले मध्य प्रदेश के पुराने शिक्षकों के लिए बुरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकार की दूसरी याचिका को भी खारिज कर दिया है। (Supreme Court Rejects Another Petition Filed by Old Teachers) शिक्षकों को, स्कूल शिक्षा मंत्री से पूछना पड़ेगा कि, वह अपनी याचिका में ऐसा कौन सा पॉइंट जोड़ दें जो सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो जाए। 

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने क्या कहा था 


उत्तर प्रदेश जूनियर हाइस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन की याचिका खारिज

उत्तर प्रदेश जूनियर हाइस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन द्वारा रिट याचिका दाखिल की गई थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में इस कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को ही चुनौती दी गई है, इसलिए इसमें कोई दम नहीं है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) उत्तर प्रदेश की रिट याचिका को खारिज कर दिया था। 

अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य

उस समय कोर्ट ने साफ कहा था कि याचिका की सारी प्रार्थनाएं एक सितंबर 2025 के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले से पहले ही तय हो चुकी हैं। एक सितंबर को शीर्ष अदालत ने आरटीई एक्ट के तहत गैर-माइनॉरिटी स्कूलों में टीईटी अनिवार्य माना था। सेवारत पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी। 

लाखों शिक्षकों की नौकरी खतरे में है

सुप्रीम कोर्ट ने अब दो बार (17 नवंबर 2025 और दस अप्रैल 2026) यूपी के शिक्षक संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों मामलों में कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ है कि आरटीई कानून और टीईटी की अनिवार्यता पर कोई ढील नहीं मिलेगी। जिन शिक्षकों की पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास न करने पर नौकरी गंवानी पड़ सकती है। 
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