मौसम समाचार डेस्क, 30 मई 2026: भारत केवल अमेरिका द्वारा बनाए गए टैरिफ से परेशान नहीं है बल्कि अमेरिका द्वारा दूसरे देशों से किया जा रहे हैं झगड़े के कारण भी परेशान है और अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के शासन वाले प्रशांत महासागर से पैदा हुआ एक समुद्री दैत्य, भारत के मानसून पर हमला कर रहा है। अरब सागर में लड़ाई चल रही है। उम्मीद है भारत का मानसून जीत जाएगा परंतु इस लड़ाई में घायल हो जाएगा। इसके कारण भारत के ज्यादातर इलाकों में जल संकट देखने को मिलेगा और कई इलाकों में सूखा पड़ने की संभावना है।
Oceanic Giants in Pacific and Atlantic May Disrupt India’s Monsoon, Raise Drought Concerns
हम जिस समुद्री दैत्य की बात कर रहे हैं वैज्ञानिक उसको El Niño कहते हैं। यह प्रशांत महासागर से पैदा होता है। प्रशांत महासागर उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का नियंत्रण वाला समुद्र है। El Niño दैत्य केवल भारत और एशिया नहीं बल्कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी तबाही मचाता है। ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली शासन अमेरिका ने पृथ्वी को एस्टेरॉइड के हमले से बचने का रास्ता तो ढूंढ लिया है परंतु El Niño की तबाही से बचने का कोई रास्ता नहीं ढूंढा है।
अरब सागर के आसमान में लड़ाई चल रही है
प्रशांत महासागर से पैदा हुआ El Niño बहुत शक्तिशाली है। भारत की सूखी जमीन पर हरियाली फैलाने वाला मानसून अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के गर्भ निश्चित समय पर पैदा हो गया था। मानसून का विकास और विस्तार भी सही समय पर और सही प्रकार से हुआ लेकिन जैसे मानसून के बादलों ने आसमान में निर्धारित ऊंचाई पर पहुंचकर भारत की तरफ आगे बढ़ना शुरू किया, दुश्मन दैत्य El Niño ने उसके ऊपर हमला कर दिया। अरब सागर के आसमान में दोनों के बीच लड़ाई चल रही है। मौसम के वैज्ञानिकों का कहना है कि, अंत में मानसून जीत जाएगा, El Niño हर जाएगा लेकिन इस लड़ाई में भारत का मानसून काफी घायल हो जाएगा। इसके कारण बहुत सारे क्षेत्र में सामान्य से 10% कम बारिश होगी। यह पेयजल संकट का कारण बनेगी और कुछ इलाकों में बहुत कम बारिश होगी जिसके कारण सूखा पड़ जाएगा।
El Niño - इस दैत्य ने पहली बार हमला नहीं किया है
El Niño नाम के समुद्री दैत्य ने पहली बार हमला नहीं किया है। लगभग हर बार हमला करने आता है और पिट कर चला जाता है। जब से वैज्ञानिकों ने इसका रिकॉर्ड रखना शुरू किया है तब से लेकर अब तक चार बार यह बहुत शक्तिशाली होकर हमला कर चुका है। वैज्ञानिक इसको Super El Niño कहते हैं।
- 1982-83
- 1991-92
- 1997-98 और
- 2015-16
इन वर्षों ने दुनिया भर में सूखा, गर्मी, जंगल की आग और मौसम की चरम घटनाओं को बढ़ाया था। लाखों लोगों की मौत हुई थी और बेहिसाब संपत्ति का नुकसान हुआ था। इसके बाद भी वैज्ञानिकों ने इससे लड़ने का कोई रास्ता नहीं खोजा। वह मानसून को कमजोर कर देता है लेकिन वैज्ञानिकों ने मानसून को फिर से शक्तिशाली बनाने के लिए कोई शक्ति वर्धक टॉनिक, टैबलेट या सिरप नहीं बनाया।
विज्ञान के पास कोई समाधान नहीं, बाबा के दरबार में भीड़ बढ़ेगी
दुनिया भर के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक केवल इतना बता रहे हैं कि कितना नुकसान हो सकता है। दुनिया भर में कोई भी ऐसी वैज्ञानिक क्रिया नहीं की जा रही है जिसके कारण Super El Niño को कमजोर या दक्षिण पश्चिम के मानसून को पावरफुल किया जा सके। ऐसी स्थिति में यदि भारत के ग्रामीण, सूखा के संकट से मुक्ति के लिए कोई यज्ञ हवन करते हैं, मेंढक की शादी करते हैं, वस्त्रहीन होकर हल चलाते हैं, तो इसमें क्या गलत करते हैं। जब "विज्ञान" हाथ नहीं पकड़ेगा तो जीवन बचाने के लिए "बाबा" का हाथ पकड़ना ही पड़ेगा। बाबा में कोई शक्ति हो या ना हो लेकिन एक आश्वासन तो होता है।

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