भोपाल, 20 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती (वर्ग 2 और 3) की प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और राज्य के विभिन्न केंद्रों पर चल रहे दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) से 18 महीने का D.El.Ed कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को अचानक 'अमान्य' (Invalid) करार दिया जा रहा है या उनके प्रकरणों को होल्ड पर डाला जा रहा है। विभाग के इस अचानक बदले रुख से हजारों चयनित अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है और उनका भविष्य दांव पर लग गया है।
पहले दी गई नियुक्तियां, अब क्यों अमान्य?
अभ्यर्थियों ने विभाग के इस निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2018 और 2020 की शिक्षक भर्तियों में इसी NIOS D.El.Ed कोर्स को पूरी तरह मान्यता दी गई थी और इसके आधार पर हजारों शिक्षक आज भी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि चालू वर्ष 2026 की वर्ग 2 और वर्ग 3 की भर्ती प्रक्रिया में भी विभाग ने पूर्व में इसे वैध माना था, लेकिन अब सत्यापन के अंतिम चरणों में इसे अमान्य किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों के प्रमुख तर्क और सवाल
चयनित अभ्यर्थियों ने मीडिया के सामने अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए हैं:
KVS में स्वीकार्यता: देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने भी अपनी भर्तियों में इस कोर्स को वैध मानकर देश भर में नियुक्तियां की हैं।
सुप्रीम कोर्ट और NCTE के दिशा-निर्देश: अभ्यर्थियों का दावा है कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों और NCTE (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही इस कोर्स को सरकारी शिक्षक भर्ती के लिए योग्य घोषित किया गया था।
विभाग का दोहरा मापदंड: जब पहले इसी डिग्री के आधार पर काउंसलिंग और नियुक्तियां हो चुकी हैं, तो वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में इसे अचानक अमान्य करना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
युवाओं का भविष्य दांव पर
विभाग के इस निर्णय से हजारों उन युवाओं के सामने संकट खड़ा हो गया है जिन्होंने वर्षों की मेहनत और परीक्षा पास करने के बाद चयनित सूची में स्थान बनाया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसी वर्ष 2026 की शुरुआती नियुक्तियों में भी इसे हरी झंडी मिली थी, फिर अचानक सत्यापन केंद्रों पर इसे 'इनवैलिड' करना उनके साथ अन्याय है।
वर्तमान में, यह मामला प्रदेश के हजारों चयनित शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है और वे विभाग से इस पर तत्काल स्पष्टीकरण और राहत की मांग कर रहे हैं।

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