भोपाल, 8 जनवरी 2026: मात्र 15 महीने चली कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका दर्द आज भी हजारों लोगों के दिलों में महसूस किया जाता है। प्रोबेशन पीरियड में वेतन की कटौती, एक ऐसा ही फैसला था। अब जाकर राहत मिली है। हाई कोर्ट ने कमलनाथ सरकार के इस फैसले को वैध घोषित करते हुए सरकार को आदेश दिया है कि प्रोबेशन पीरियड में काटे गए पूरे पैसे कर्मचारियों को लौटाए जाएं।
प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती अवैध: हाई कोर्ट
हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का 12 दिसंबर 2019 को जारी परिपत्र निरस्त कर दिया है, जिसके तहत नई भर्तियों में प्रोबेशन के पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जा रहा था। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने कहा कि जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम ले रही है, तो प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रोबेशन अवधि में भी “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत पूरी तरह लागू होगा।
कर्मचारियों को 70%, 80% और 90% वेतन दिया जा रहा था
12 दिसंबर 2019 को जारी आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई थी। इस दौरान कर्मचारियों को पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में क्रमशः 70%, 80% और 90% वेतन दिया जा रहा था, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
MPPSC और ESB से चयनित कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में अंतर
परिपत्र में MPPSC से नियुक्त कर्मचारियों और कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए थे। MPPSC से चयनित कर्मचारियों को केवल 2 साल प्रोबेशन और पहले साल से ही पूरा वेतन दिया जा रहा था। वहीं कर्मचारी चयन मंडल से भर्ती कर्मचारियों को 3 साल प्रोबेशन और तीन साल तक कटौती वाला वेतन मिल रहा है। हाईकोर्ट ने इसे भेदभावपूर्ण और नैसर्गिक न्याय के खिलाफ माना।
हाई कोर्ट का आदेश सभी कर्मचारियों के लिए
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोबेशन पीरियड में वेतन की रिकवरी पूरी तरह अवैध है। राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि जिन कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिला उन्हें 100% वेतन का लाभ दिया जाए। और कटी हुई राशि एरियर्स के रूप में वापस की जाए।
किसी कर्मचारी का कितना नुकसान हुआ
FAQs: सभी संभावित प्रश्नों के उत्तर
मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड और वेतन कटौती से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर (FAQs) इस प्रकार हैं:
1. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन के संबंध में क्या महत्वपूर्ण आदेश दिया है?
हाई कोर्ट ने कमलनाथ सरकार के उस फैसले को अवैध घोषित कर दिया है जिसके तहत प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) में कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जा रही थी। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि प्रोबेशन अवधि के दौरान काटे गए पूरे पैसे कर्मचारियों को वापस लौटाए जाएं।
2. हाई कोर्ट ने किस विशिष्ट सरकारी आदेश या परिपत्र को रद्द किया है?
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी परिपत्र को निरस्त कर दिया है। इसी परिपत्र के आधार पर नई भर्तियों में प्रोबेशन के दौरान पूर्ण वेतन नहीं दिया जा रहा था।
3. पुरानी व्यवस्था के तहत प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन का भुगतान किस प्रकार किया जा रहा था?
12 दिसंबर 2019 के आदेश के बाद, कर्मचारियों को उनके प्रोबेशन के पहले वर्ष में 70%, दूसरे वर्ष में 80% और तीसरे वर्ष में 90% वेतन दिया जा रहा था। इसके साथ ही, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन की अवधि भी 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई थी।
4. कोर्ट ने इस वेतन कटौती को अवैध ठहराने के लिए क्या तर्क दिया?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम ले रही है, तो वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं है। अदालत के अनुसार, प्रोबेशन अवधि में भी “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत पूरी तरह लागू होगा।
5. हाई कोर्ट ने नियमों में किस तरह के भेदभाव को रेखांकित किया?
MPPSC से नियुक्त कर्मचारियों को केवल 2 साल का प्रोबेशन और पहले साल से ही पूरा वेतन मिल रहा था। इसके विपरीत, कर्मचारी चयन मंडल (ESB) से भर्ती कर्मचारियों के लिए 3 साल का प्रोबेशन और वेतन कटौती के नियम थे, जिसे कोर्ट ने भेदभावपूर्ण और नैसर्गिक न्याय के खिलाफ माना।
6. कर्मचारियों को उनकी कटी हुई राशि (वेतन) कैसे वापस मिलेगी?
राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि जिन कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिला है, उन्हें अब 100% वेतन का लाभ दिया जाए। इसके अलावा, प्रोबेशन के दौरान काटी गई राशि को एरियर्स (Arrears) के रूप में वापस किया जाएगा।
7. इस वेतन कटौती से अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों को कितना आर्थिक नुकसान हुआ?
बेसिक वेतन के आधार पर अनुमानित नुकसान इस प्रकार है:
• चतुर्थ श्रेणी (₹15,500 बेसिक): लगभग ₹1,74,840 का नुकसान।
• तृतीय श्रेणी (₹19,500 बेसिक): लगभग ₹2,19,420 का नुकसान।
• तृतीय श्रेणी (₹25,500 बेसिक): लगभग ₹2,85,085 का नुकसान।
• तृतीय श्रेणी (₹36,200 बेसिक): लगभग ₹4,07,078 का नुकसान।
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