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INDORE में डॉ. मरावी की मौत, 40 डॉक्टर महामारी का शिकार - CORONA NEWS

इंदौर। मप्र के इंदौर शहर अरबिंदो हॉस्पिटल के डॉ. प्रवेश मरावी की मौत हो गई। उनके फेफड़ों में संक्रमण था। परिजनों का आरोप है कि कोरोना से उनकी जान गई। हालांकि अस्पताल का कहना है कि उन्हें सिकलसेल एनीमिया था। सोमवार शाम साथी डॉक्टरों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, डॉक्टर मरावी की सोमवार को इलाज़ के दौरान मौत हो गई। शुरुआती लक्षण दिखने के बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। वहीं दूसरी और 1 दिन में MGM  मेडिकल कॉलेज मिलाकर 40 जूनियर डॉक्टर में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

कोरोना के शुरुआती लक्षण के बाद एनेस्थीसिया विभाग के पीजी डॉक्टर प्रवेश मरावी का 2 सितंबर को सैंपल लिया गया था। 3 को रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन सिटी स्कैन में लंग्स में इंफेक्शन दिखा था। इसी कारण उन्हें वहीं पर अस्पताल में एडमिट कर इलाज़ शुरू किया गया था। बताते हैं कि वे पहले से सिकल सेल एनीमिया के मरीज़ थे, इसी कारण अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इनकी ड्यूटी कोविड वार्ड में नहीं लगाई गई थी। इसलिए 3 तारीख़ से लगातार उनका इलाज़ भी चल रहा था। हालांकि अस्पताल प्रंबधन ने परिवार को सूचना 2 दिन पहले दी। उनकी पत्नी छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज में पदस्थ हैं।

अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि डॉ. मरावी को सिकल सेल एनीमिया था, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। सिटी स्कैन में लंग्स में 10% तक इंफेक्शन जरूर आया था। उसका भी इलाज़ चल रहा था। इधर, यह बात सामने आई है कि परिवार का कहना कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव या पॉजिटिव आने की संभावना रहती है और डॉ. मरावी को कोरोना के शुरुआती लक्षणों के बाद ही अस्पताल में भर्ती किया गया था। फिर ध्यान क्यों नहीं रखा गया। 

एमजीएम मेडिकल कॉलेज 33 जूनियर डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन्हें सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया है। वहां पहली बार कोरोना मरीज रखे गए हैं। कुछ की स्थिति थोड़ी खराब है। अरबिंदो के भी 7 पीजी डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव आए हैं। राहत की बात है कि 60 % मरीज एसिम्टोमैटिक होंगे। इलाज होम आइसोलेशन में हो जाएगा। अक्टूबर अंत तक 55 हजार एक्टिव मरीज में 15 से 20 हजार मरीज को बेड की जरूरत होगी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज मिलाकर 40 पीजी डॉक्टर में संक्रमण की पुष्टि हुई है।  

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