एक ही आदेश से नियुक्त हेंडपंप तकनीशियनों के वेतनमान में भिन्नता - EMPLOYEE NEWS

Bhopal Samachar
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भोपाल। मप्र में हेंडपंप तकनीशियनों की नियुक्ति वर्ष 1989 में सीधी भर्ती व 1991 में कार्यभारित दैनिक वेतनभोगी के रूप में की गई थी। मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने संयुक्त विज्ञप्ति में बताया कि नीमच-मंदसौर जिलों के सत्यनारायण सूत्रकार, दिलीप तिवारी व अन्य के लिए माननीय ट्रिब्यूनल न्यायालय ने याचिका क्रमांक 667/94 पर पारित आदेश दिनांक 23/03/1998 से प्रथम नियुक्ति दिनांक से वेतनमान 1150-1800 में नियमित करने के आदेश दिये थे। 

इसी आधार पर इन्हें पाँचवे व छठे वेतनमान में लाभ दिया जाता रहा। इन कर्मचारियों की सेवापुस्तिकाओं में संभागीय कार्यालय  कोष लेखा एवं पेंशन विभाग ने वेतनमान पारित किया हुआ है। सातवें वेतनमान में नीमच मंदसौर जिलों में इन्हें पुनः निचले वेतनमान में मानकर वसूली आदेश जारी कर दिये। व्यथित होकर पुनः माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में याचिका क्रमांक 4577 व 7373 दायर की थी जिस पर दिनांक 22 जून एवं 23 अक्तूबर 2018 को आदेश पारित किये गये है कि इनकी वसूली नहीं की जा सकती लेकिन  वेतनमान अफेल्ड माना। 

फैसले को चुनौती देते हुए पुनः माननीय न्यायालय की डबल बैंच में रिट पिटीशन क्रमांक 1167 व 1883/2018 दायर की थी इनका निराकरण करते हुए दिनांक 21/12/2018 एवं 21/01/2019 को इन्हें नियुक्ति दिनांक से नियमित मानकर 1150-1800 वेतनमान देने के आदेश पारित किये गये हैं। श्री के के सोनगरिया प्रमुख अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बाणगंगा भोपाल ने उक्त कर्मचारियों के पक्ष में माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के फैसले की उपेक्षा की है। 

इसी प्रकार की नियुक्ति प्राप्त खरगोन, बड़वानी व बालाघाट ज़िलों के कर्मचारियों को वित्त विभाग से अनुमोदन प्राप्त कर लाभ दिया जा रहा है। "मप्र तृतीय वर्ग शास कर्म संघ" मांग करता है कि प्रदेश के सभी जिलों में भेदभाव समाप्त कर उक्त कर्मचारियों को एक समान 1150-1800 वेतनमान के आधार पर सातवें वेतनमान में पुनरीक्षित किया जावे। साथ ही समयमान वेतनमान के लाभ भी दिये जावे। 

विडम्बना है कि पूरे सेवाकाल में कर्मचारी अपना जायज हक पाने के लिए न्यायालय की चौखट पर डेरा डाले है, न्याय की आशा में इनमें से कुछ दिवंगत हो गये कुछ सेवानिवृत हो गये या होने वाले है। यह सरकार व विभाग के लिए शर्म की बात है।  

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