MP ओबीसी आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट से ब्रेकिंग न्यूज़, समस्त अंतरिम आदेश प्रभाव शून्य

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के बारे में सुप्रीम कोर्ट से आज ब्रेकिंग न्यूज़ आई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित समस्त अंतरिम आदेश प्रभाव शून्य मानते हुए ओबीसी आरक्षण के सभी मामलों को हाई कोर्ट को वापस कर दिया है। 

मध्य प्रदेश ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि, मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के लंबे समय से चले आ रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण से संबंधित सभी मामलों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वापस भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी अंतरिम आदेशों का प्रभाव शून्य माना जाएगा। कोर्ट ने इन मामलों को हाईकोर्ट को ट्रांसफर करते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण कानून की संवैधानिक वैधता का निर्णय हाईकोर्ट द्वारा किया जाए। 

13% पदों को अनहोल्ड करने के लिए सरकार स्वतंत्र

इससे पहले ये मामले सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किए गए थे, लेकिन अब कोर्ट ने उन्हें मूल अदालत यानी हाईकोर्ट में लौटा दिया है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 27% ओबीसी आरक्षण लागू करना और पदों को अनहोल्ड (unlock) करना राज्य सरकार की मंशा और नीति पर निर्भर करेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की और प्रकरणों में अनावश्यक देरी के लिए सरकार की जिम्मेदारी को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने सरकार के रवैये को गंभीरता से लिया, खासकर ट्रांसफर के आधार और सुनवाई में देरी को लेकर। 

ओबीसी वर्ग की ओर से इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ के मामलों से मध्य प्रदेश के मामले अलग हैं, क्योंकि छत्तीसगढ़ में हाईकोर्ट ने निर्णय दे दिया है, जबकि मध्य प्रदेश में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और न ही कोई स्टे है। 

यह फैसला युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी भर्तियों में 13% पद होल्ड किए जा रहे थे, जिससे लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। अब हाईकोर्ट में मामलों की सुनवाई तेजी से होने की संभावना है, जहां संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय आ सकेगा। राज्य सरकार अब इस फैसले के बाद आगे की रणनीति तय करेगी, जबकि ओबीसी संगठन इसे एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि हाईकोर्ट में आगे क्या होता है।
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