सुप्रीम कोर्ट ने तय किए शिक्षकों की योग्यता के कड़े स्टैंडर्ड, पात्रता परीक्षा का महत्व

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026
: उच्चतम न्यायालय ने एजुकेशन की क्वालिटी और एकेडमिक स्टैंडर्ड्स को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए केवल मास्टर डिग्री होना काफी नहीं है, बल्कि 'राज्य पात्रता परीक्षा' (SET) भी उसी संबंधित विषय में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने जुबैर पी. बनाम केरल राज्य और अन्य मामले में यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। 

मलयालम में SET करके अर्थशास्त्र के शिक्षक बन गए

मामले की शुरुआत तब हुई जब केरल राज्य में, अपीलकर्ता जुबैर पी. को 15 जुलाई 2021 को एक स्कूल में हायर सेकेंडरी स्कूल टीचर (अर्थशास्त्र) के रूप में नियुक्त किया गया था। जुबैर के पास अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री तो थी, लेकिन उनकी SET योग्यता 'मलयालम' विषय में थी। दूसरी ओर, प्रतिवादी संख्या 4 (एक अन्य उम्मीदवार) के पास अर्थशास्त्र में ही मास्टर डिग्री और अर्थशास्त्र में ही SET योग्यता थी। इसी आधार पर जुबैर की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी कि उन्होंने संबंधित विषय (अर्थशास्त्र) में SET पास नहीं किया है। 

अपीलकर्ता का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी 

जुबैर पी. के वकीलों ने केरल शिक्षा नियमों (KER) के नियम 6.2(24) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि नियम में मास्टर डिग्री और बी.एड. के लिए तो "संबंधित विषय" (concerned subject) शब्द का उपयोग किया गया है, लेकिन SET के लिए ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका कहना था कि SET केवल एक सामान्य शिक्षण अभिरुचि की परीक्षा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कानून को उसके उद्देश्य और संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हायर सेकेंडरी स्तर पर शिक्षण के ऊंचे मानकों को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक को उस विशिष्ट विषय का गहन ज्ञान हो जिसे वह पढ़ाने जा रहा है। न्यायालय ने SET परीक्षा के प्रॉस्पेक्टस का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट है कि परीक्षा का दूसरा पेपर उम्मीदवार के विशेषज्ञता वाले विषय पर आधारित होता है। 

अनुभव में 36 दिन की कमी के कारण नौकरी चली गई

जुबैर पी. ने नियम 10(4) के तहत 10 साल के शिक्षण अनुभव के आधार पर SET से छूट का दावा भी किया था। लेकिन रिकॉर्ड की जांच करने पर कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता का कुल अनुमोदित सेवा काल 9 साल, 10 महीने और 14 दिन था, जो निर्धारित 10 साल की अवधि से कम है। इस कारण उन्हें यह छूट भी नहीं मिल सकी। अनुभव में सिर्फ 36 दिन की कमी के कारण जुबेर को यह लाभ नहीं मिल पाया। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

कोर्ट का अंतिम फैसला उच्चतम न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें जुबैर की नियुक्ति को अवैध माना गया था। न्यायालय ने निर्देश दिया कि:
• प्रतिवादी संख्या 4 (योग्य उम्मीदवार) को अर्थशास्त्र शिक्षक के पद पर नियुक्त किया जाए।
• अपीलकर्ता (जुबैर पी.) को अब तक दिए गए वेतन की कोई वसूली नहीं की जाएगी।

न्यायालय ने अंत में यह स्पष्ट किया कि किसी भी विषय में SET पास करके दूसरे विषय का शिक्षक बनना शैक्षणिक मानकों के साथ समझौता होगा और कानून का ऐसा अर्थ नहीं निकाला जा सकता जिससे व्यवस्था में विसंगति पैदा हो।
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