तीन साल परिवीक्षा अवधि और वेतनमान के विधेयक को हाइकोर्ट में चुनौती, mp school education news

Updesh Awasthee
जबलपुर, 12 फरवरी 2026
: मंगलवार को हाईकोर्ट में एक अहम मुद्दे पर सुनवाई हुई। तीन साल परिवीक्षा अवधि और 70-80-90% वेतनमान व्यवस्था लागू करने वाले विधेयक को याचिका "आनन्द कुमार मिश्रा बनाम मध्यप्रदेश सरकार" द्वारा चुनौती दी गई। 

हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

श्री आनन्द कुमार मिश्रा ने बताया कि, समान कार्य समान वेतनमान के सिद्धांत को आधार बनाकर मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के 1070 शिक्षकों ने उनके निर्देशन में एकजुट होकर एडवोकेट श्री राहुल दिवाकर के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2019 में लागू की गई वेतन कटौती व्यवस्था को कानूनी रूप से असंवैधानिक और अमानवीय बताते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में माननीय मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में अपना पक्ष रखा। याचिका को सुनने के उपरांत माननीय मुख्य न्यायाधीश ने मध्यप्रदेश सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया है। और जवाब दाखिल होने के उपरांत अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को नियत की गई है। 

कमलनाथ सरकार ने भर्ती के बीच में नियम बदल दिया था

आपको बताते चलें कि ये समस्त 1070 शिक्षक 2018 में विज्ञपित भर्ती के माध्यम से चयन होने के उपरांत मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत है। इनकी भर्ती का विज्ञापन सितंबर 2018 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा जारी किया गया था। परीक्षा और परिणाम जारी होने के उपरांत 2019 में कमलनाथ सरकार ने बीच भर्ती में परिवीक्षा अवधि तीन साल करते हुए 70-80-90% (क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष) वेतनमान व्यवस्था लागू कर दी गई। और संबंधित शिक्षकों को इन्हीं नए नियमों के अंतर्गत वेतनमान व्यवस्था के अनुसार वेतन दिया गया। जबकि कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश है कि एक बार भर्ती शुरू होने के बाद भर्ती के नियम नहीं बदले जा सकते हैं। 

मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे आदेशों को ताक पर रखते हुए शिक्षक भर्ती 2018 में 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि का नियम लागू किया है।

शिक्षकों द्वारा इन्हीं समस्त बिंदुओं को हाईकोर्ट में प्रस्तुत करते हुए अपना पक्ष रखा और हाईकोट ने मध्यप्रदेश सरकार को 4 हफ्तों में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। 

हाई कोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश को रद्द कर चुका है

इसी तरह के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग के 70-80-90% वेतनमान और तीन साल परिवीक्षा अवधि संबंधित जारी आदेश दिनांक 12/12/2019 को रद्द कर चुका है। इसी आदेश को आधार बनाकर समस्त विभागों ने अपने विभागीय राजपत्र जारी कर 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था लागू की थी। परन्तु 12/12/2019 के आदेश के रद्द होने के बावजूद भी सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को 70,80,90% वेतनमान व्यवस्था में बनाए रखना जारी रखा हुआ है। जिससे कर्मचारियों को बार बार उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। उम्मीद है कि इस याचिका के माध्यम से इन शिक्षकों को इनका हक (नियुक्ति दिनांक से 100% वेतन एवं ब्याज सहित एरियर्स की राशि) माननीय हाईकोर्ट द्वारा प्रदान किया जायेगा।
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