भोपाल समाचार, 12 फरवरी 2026: जिसका शक था वह सामने आ गया है। गांधी मेडिकल कॉलेज की छात्रा और रोशनी सिंह के पिता ने भी दावा किया है कि उनकी बेटी सुसाइड नहीं कर सकती और उसकी बॉडी में जहर के संकेत, चेहरे पर घबराहट और उल्टी के निशान भी नहीं थे। पिता को शक है की बेटी की हत्या की गई है। जबकि डीन सहित पूरा कॉलेज मैनेजमेंट पुलिस इन्वेस्टिगेशन से पहले मामले को आत्महत्या बताने पर तुला हुआ है।
रोशनी के पिता वंतर सिंह का बयान
मैंने शव देखा, तो उसमें एसिड या जहर पीने के कोई स्पष्ट निशान नहीं दिखे। न कपड़े खराब थे, न उल्टी-घबराहट के कोई संकेत दिखे। मौके पर एसिड बोतल तक नहीं दिखी। हमें वॉशरूम जाने भी नहीं दिया जा रहा था। कहा कि पुलिस ने सील कर दिया है। मेरी बेटी इतनी कमजोर नहीं थी कि आत्महत्या जैसा कदम उठा ले। हमें पीजी के वार्डन और कॉलेज प्रबंधन की दी जानकारी पर भरोसा नहीं है। घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी और रोशनी की जिंदगी यू खत्म न हो।
मुझे बताया कि रोशनी रात 2 बजे वॉशरूम गई और जहर पी लिया। लेकिन हमें इसकी जानकारी सुबह 8.30 बजे दी गई। जब फोन आया, तब तक यह खबर मीडिया में फैल चुकी थी। अगर बच्ची की हालत रात में ही खराब हो गई थी, तो हमें तुरंत क्यों नहीं बताया गया? ऐसी स्थिति में सबसे पहले पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
पूरा कॉलेज मैनेजमेंट मामले को छुपाने की कोशिश कर रहा है
पिता वंतर सिंह ने कहा कि बेटी ने गांधी मेडिकल कॉलेज का चयन खुद किया था। पढ़ाई का दबाव था, यह वह मानती थी, लेकिन सुसाइड कर लेगी, हमें स्वीकार नहीं। जिस तरह से घटना के बाद पूरा नैरेटिव गढ़ा गया, उसमें कई विरोधाभास हैं। परिवार को जो जानकारी दी गई, वह संदेह पैदा करती है।
मैंने पूरी सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, लेकिन मुझे सिर्फ रात की एक छोटी क्लिप दिखाई गई। हमसे कहा कि पूरी फुटेज पुलिस को दे दी गई है। हमें सिर्फ इतना दिखाया गया कि बच्ची वॉशरूम की तरफ जा रही है। उसके बाद क्या हुआ, यह हमें नहीं बताया गया।
जब हम गांधी मेडिकल कॉलेज पहुंचे और अपनी बात रखनी चाही, तो सीनियर स्टूडेंट्स हमें ही शांत कराने लगे। हम सवाल पूछ रहे थे। उनकी तरफ से गोल-गोल जवाब दिए जा रहे थे। हमें नहीं लगता कि हमारी बेटी सुसाइड कर सकती है। पूरी घटना की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
GMC डीन डॉ. कविता एन. सिंह का दूसरा डाउटफुल स्टेटमेंट
GMC डीन डॉ. कविता एन. सिंह की भूमिका लगातार संदिग्ध चल रही है। वह पहले घंटे से ही मामले की दिशा मोड़ने की कोशिश कर रही है। रोशनी सिंह के साथ जो कुछ भी हुआ 10 फरवरी को प्राइवेट हॉस्टल में हुआ। डॉ कविता सिंह से इसका कोई सीधा कनेक्शन नहीं था लेकिन उन्होंने खुद आगे बढ़कर दावा किया कि रोशनी ने सुसाइड किया है। उन्होंने यह भी बताएं की रोशनी के मोबाइल मैसेज से यह पता चलता है कि वह पढ़ाई को लेकर तनाव में थी।
➤ आज फिर से उनका एक और बयान सामने आया है जिसमें डॉक्टर कविता बोल रही है कि, हमारे पास 2 सालों में डिप्रेशन के 40 केस आए हैं। रोशनी के मामले में हमें कोई सूचना नहीं मिली कि वह सुसाइड के बारे में सोच रही है। अगर रूममेट, दोस्त या परिवार को कोई आशंका थी और समय पर बताया जाता तो शायद उसे बचाया जा सकता था।
डॉ कविता के बयान से पैदा हुए सवाल
➧ घटना प्राइवेट हॉस्टल में हुई है तो फिर डॉक्टर कविता बार-बार बयान क्यों दे रही है।
➧ बॉडी का पोस्टमार्टम होने से पहले डॉक्टर कविता ने आत्महत्या का दावा क्यों किया।
➧ डॉक्टर कविता को कैसे पता की रोशनी ने अपने मोबाइल से किसको और क्या मैसेज किए हैं।
➧ जब रोशनी ने कभी कोई चेकअप करवाया ही नहीं तो फिर डॉक्टर कविता कैसे दावा कर रही है कि वह डिप्रेशन में थी।
➧ पढ़ाई की टेंशन तो पांचवी के बच्चे को भी होती है, पढ़ाई के तनाव में कोई सुसाइड थोड़े ना करता है।
वह क्या है जिसको छुपाने के लिए डॉक्टर कविता सामने आ रही है
यह जानना बहुत जरूरी है कि वह क्या है जिसको छुपाने के लिए डॉक्टर कविता सामने आ रही है। पहली नजर में इस पूरे मामले का डॉक्टर कविता से कोई कनेक्शन नहीं था। प्राइवेट हॉस्टल में कोई भी घटना हो सकती थी और इसके लिए प्राइवेट हॉस्टल के वार्डन और उसके साथ रहने वाले स्टूडेंट्स जिम्मेदार माने जाते लेकिन उतावलेपन में डॉक्टर कविता ने खुद को एक्सपोज कर दिया है। स्पष्ट रूप से बता दिया कि वह किसी बात को छुपाने की कोशिश कर रही है। अपने पद का दुरुपयोग कर रही है कि मैं सीनियर डॉक्टर हूं, इसलिए मेरी बात मानो।

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