भोपाल समाचार, 9 फरवरी 2026: विधायक अरुण भीमावद पर बड़े गंभीर आरोप लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक अज्ञात शुभचिंतक ने पार्टी के पास काफी बड़ा ड्राफ्ट भेजा है। इसमें विधायक के बारे में आठ बड़े खुलासे किए गए हैं। इनमें से आप नंबर दो अपने आप में एक नई बात है। इसमें बताया गया है कि, अरुण भीमावद विधानसभा से जितने भी मरीजों को अच्छे इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जाता है, इसके बदले में विधायक द्वारा कमीशन वसूल जाता है। यह कमीशन इलाज करने वाले डॉक्टर से लिया जाता है।
विधायक अरुण भीमावद पर आठ बड़े गंभीर आरोप
विधायक अरुण भीमावद के खिलाफ पार्टी को किसी अज्ञात शुभ चिंतक पत्र मिला है। विधायक की तरफ से बताया जा रहा है कि इस तरह नेताओं को परेशान करने की परंपरा है लेकिन, बात जो भी हो। यदि शिकायत सामने आई है तो उसकी जांच भी होनी चाहिए और जब तक जांच नहीं हो जाती तब तक विधायक को दागी माना जाना चाहिए। पढ़िए विधायक के खिलाफ क्या शिकायत मिली है:-
आरोप-1. भू-माफिया से सांठगांठ
शाजापुर में कटने वाली हर अवैध कॉलोनी में विधायक की कथित तौर पर साझेदारी है। जब भी प्रशासन इन कॉलोनियों पर कार्रवाई की कोशिश करता है, तो विधायक का राजनीतिक दबाव आड़े आ जाता है।
यह भी दावा किया गया है कि जो कॉलोनाइजर उन्हें ‘चढ़ावा’ नहीं देते, उनकी जमीनों का लैंड यूज (CLU) जानबूझकर नहीं होने दिया जाता, जिससे वे परेशान होकर घुटने टेक दें।
आरोप-2. मेडिकल माफिया और रेफरल का खेल
पत्र में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि विधायक के संरक्षण में कुछ चुनिंदा डॉक्टर सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को जबरन निजी अस्पतालों में रेफर करते हैं।
इस ‘रेफरल खेल’ में मोटे कमीशन का लेनदेन होता है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना के फंड में बड़े पैमाने पर गबन करने और इंदौर व पचोर में पार्टनरशिप में अस्पताल बनवाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
आरोप-3. ठेकेदारी में 10-20% कमीशन का तंत्र
पत्र के अनुसार, शहर में होने वाले हर बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में विधायक का 10% और नगर पालिका के कामों में 20% कमीशन तय है। आरोप है कि हाल ही में स्वीकृत हुए एबी रोड चौड़ीकरण के ठेकेदार से करोड़ों रुपए की रिश्वत की डील चल रही है।
दिलचस्प बात यह है कि पत्र में विपक्षी दलों से जुड़े ठेकेदारों से भी उनके मधुर संबंधों का दावा किया गया है।
खत में कुछ लोगों के नाम का जिक्र करते हुए उन्हें विधायक की ‘गुंडा-टीम’ का सदस्य बताया गया है। आरोप है कि यह टीम आरटीओ, पुलिस, शिक्षा विभाग और मेडिकल संस्थानों से अवैध वसूली करती है। शहर में फल-फूल रहे सट्टे और जुए के कारोबार को भी विधायक का संरक्षण होने की बात कही गई है।
आरोप-5. धर्म का ‘नाटकीकरण’ और जमीनों पर कब्जा
धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के नाम पर मंदिरों की बेशकीमती जमीनों पर दुकानें बनवाकर उन्हें अपने करीबियों को औने-पौने दामों में बांटने का आरोप है। पत्र में विशेष रूप से नीमबाड़ी राम मंदिर और भूतेश्वर महादेव मंदिर की जमीन पर ‘व्यावसायिक कब्जे’ की योजना का जिक्र किया गया है।
आरोप-6. विकास कार्यों में जानबूझकर अनदेखी
पत्र में आरोप है कि विधायक केवल उन्हीं कामों में रुचि दिखाते हैं, जहां उन्हें निजी लाभ मिलता है। शहर के चिल्लर डैम की गंदगी और सड़कों के गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, क्योंकि इन कार्यों से उन्हें कोई ‘फायदा’ नहीं होता।
आरोप-7. मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी निवेश
सबसे संगीन आरोप भ्रष्टाचार से कमाई गई दौलत को ठिकाने लगाने से जुड़ा है। पत्र के अनुसार, शाजापुर से वसूला गया काला धन इंदौर की प्रॉपर्टी और सिंगापुर में स्थित ‘शेल कंपनियों’ में विधायक के दामाद के जरिए निवेश किया जा रहा है। यह आरोप मामले को स्थानीय राजनीति से उठाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों से जोड़ता है।
आरोप-8. संगठन और विचारधारा पर प्रहार
पत्र के अंत में लिखने वाले का दावा है कि विधायक नशे की हालत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। उसने बीजेपी के बाकी नेताओं और संगठन से इस ‘माफिया राज’ से शाजापुर को मुक्ति दिलाने की भावुक अपील की है।

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