भोपाल समाचार, 10 फरवरी 2026: गांधी मेडीकल कॉलेज का मैनेजमेंट एक बार फिर शक के दायरे में आ गया है। 4 महीने पहले MBBS में एडमिशन लेने वाली आलीराजपुर की ब्रिलिएंट स्टूडेंट की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई। उसके क्लासमेट्स और हॉस्टल का सिक्योरिटी गार्ड उसकी डेड बॉडी को हमीदिया हॉस्पिटल लेकर आए थे। हॉस्टल में क्या हुआ यह पुलिस इन्वेस्टिगेशन का सब्जेक्ट है लेकिन कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने अभी से सफाई देना शुरू कर दिया है।
रोशनी के क्लासमेट्स द्वारा बताई गई कहानी
रोशनी कुलेश पिता बंतर सिंह कुलेश (उम्र 19 वर्ष) डे-स्कॉलर थी और कोहेफिजा थाना क्षेत्र में प्राइवेट हॉस्टल में रह रही थी। जब वह सुबह कॉलेज के लिए अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, तो साथ पढ़ने वाले स्टूडेंट्स उसे बुलाने के लिए पहुंचे। छात्राओं के मुताबिक, रोशनी को कई बार आवाज दी। उसे फोन कॉल किया, लेकिन रोशनी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद पीजी के गार्ड को सूचना दी। गार्ड पहुंचा तो पहले कमरे और फिर बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया, जहां रोशनी पड़ी मिली।
स्टूडेंट्स ने बताया कि रोशनी के पास एक खाली एसिड की बोतल भी पड़ी हुई थी। फौरन कॉलेज प्रबंधन को सूचना दी गई। रोशनी को सुबह करीब 8:30 बजे हमीदिया अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ले जाया गया। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर्स ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
रोशनी आलीराजपुर की रहने वाली थी। साथी छात्रों ने बताया कि वह पिछले हफ्ते ही घर से लौटकर भोपाल आई थी। वह पढ़ाई को लेकर गंभीर और शांत स्वभाव की थी।
फिलहाल रोशनी के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भोपाल के मसूरी क्षेत्र स्थित मॉर्चुरी भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले की सूचना परिजनों को दे दी है। घटना को लेकर कोहेफिजा पुलिस जांच कर रही है। मौत के कारणों का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन ने सफाई देना शुरू कर दिया
रोशनी की मौत प्राइवेट हॉस्टल में हुई है। कॉलेज को लेकर अभी कोई सवाल नहीं उठाया गया, पुलिस की इन्वेस्टीगेशन शुरू नहीं हुई है लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने सफाई देना शुरू कर दिया है। पुलिस की इन्वेस्टीगेशन शुरू होने से पहले ही डॉक्टर कविता सिंह इन्वेस्टिगेशन का नतीजा बता रही है। उनका कहना है कि, रोशनी के मोबाइल में परिजन को भेजे गए मैसेज से पता चला है कि वह पढ़ाई को लेकर तनाव में थी। मेहनत करने के बावजूद ठीक से समझ नहीं पा रही थी।
डॉक्टर कविता की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए
सवाल तो बनता है कि जब पुलिस को नहीं पता रोशनी के मोबाइल में क्या मैसेज है तो फिर डॉक्टर कविता सिंह को कैसे पता चले। वह पुलिस के किसी भी स्टेटमेंट से पहले इस प्रकार का जजमेंट क्यों दे रही है। यदि वह तनाव में थी तो पढ़ाई छोड़ सकती थी, जिंदगी छोड़ने की क्या जरूरत थी। इस तरह सबसे पहले आगे आकर लड़की की मौत के लिए उसी को जिम्मेदार बताने की कोशिश करना, अपने आप में एक संदिग्ध गतिविधि है। इस केस में डॉक्टर कविता की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

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