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INDORE के बॉम्बे हॉस्पिटल, अरविंदो अस्पताल और मध्यप्रदेश शासन को हाईकोर्ट का नोटिस - MP NEWS

इंदौर
। मरीजों को इमरजेंसी में भी इलाज देने से मना करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए एडवोकेट अचला जोशी मामले में इलाज करने से इनकार करने वाले बॉम्बे हॉस्पिटल, अरविंदो अस्पताल और मध्यप्रदेश शासन को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। याचिका में इंदौर के सभी प्राइवेट अस्पतालों को अधिग्रहित करने की मांग की गई है।
 मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शासन, अरबिंदो अस्पताल और बॉम्बे अस्पताल को नोटिस जारी कर पूछा है कि अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। मौतें हो रही हैं। आखिर सरकार और निजी अस्पताल मिलकर भी व्यवस्था क्यों नहीं संभाल पा रहे हैं? इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार बताए कि आखिर ऐसे हालात बने ही क्यों? कोरोना का संक्रमण पांच महीने से है। सरकार ने अब तक क्या किया और निजी अस्पताल इसमें क्या कर रहे हैं?

बॉम्बे अस्पताल ने इमरजेंसी में भी एडवोकेट अचला जोशी का इलाज नहीं किया था

उच्च न्यायालय ने यह नोटिस उस जनहित याचिका को स्वीकार करने के बाद जारी किया है जिसमें निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिलने से होने वाली मौतों का मामला उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि निजी अस्पताल कोरोना के नाम पर जमकर चांदी काट रहे हैं। खास लोगों को इलाज मिल रहा है, आम आदमी परेशान हो रहा है। उच्च न्यायालय की वरिष्ठ वकील अचला जोशी को हृदयाघात के दौरान न बॉम्बे अस्पताल में इलाज मिला, न ही अरबिंदो अस्पताल में। दोनों ही अस्पतालों में बिस्तर नहीं होने की बात कहकर इलाज से इन्कार कर दिया गया था। समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई।

प्राइवेट अस्पतालों को अधिग्रहित करने की मांग

उच्च न्यायालय में यह जनहित याचिका बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल ओझा ने दायर की है। याचिकाकर्ता की तरफ से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक रावल पैरवी कर रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि जिला प्रशासन निजी अस्पतालों को पूरी तरह से अपने आधिपत्य में ले जिससे कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों के कारण जरूरी होने पर अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा मिल सके और इलाज के अभाव में किसी की मौत न हो। मरीजों के इलाज से इन्कार करने वाले निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं। गुरुवार को याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने शासन और उक्त दोनों निजी अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी। 

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