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कमलनाथ: मजदूरों की मदद या संवेदनशीलता का ड्रामा, 4 मई से अब तक अठन्नी अदा नहीं की / MP NEWS

भोपाल। आपातकाल में सरकार से तत्काल राहत की मांग करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ, सोनिया गांधी के प्रति कितने निष्ठावान हैं और गरीब मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए कितने तत्पर हैं इसका प्रमाण आज उस समय मिला जब उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल किया। 

सोनिया गांधी ने क्या घोषणा की थी

दिनांक 4 मई 2020 दिन सोमवार को कांग्रेस पार्टी की अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने बताया कि दूसरे राज्यों से अपने घर जा रहे हैं मजदूरों से भारतीय रेल द्वारा मनमाना किराया वसूल किया जा रहा है। सोनिया गांधी ने घोषणा की कि सरकार मजदूरों से किराया वसूल करके उन पर अत्याचार कर रही है, कांग्रेस पार्टी की राज्य इकाइयां मजदूरों के किराए का भुगतान करेंगी। 

पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने क्या किया 

दिनांक 7 मई 2020 को पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री कमलनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नाम लिखे एक पत्र को वायरल किया। इस पत्र में उन्होंने पूरी जानकारी सहित उन लोगों की लिस्ट मांगी है जो मध्य प्रदेश के बाहर फंसे हुए हैं। मजेदार बात यह है कि कमलनाथ ने घोषणा के तीसरे दिन पत्र लिखा और चौथे दिन प्रेषित किया परंतु यह जानकारी उन्होंने तत्काल मांगी है। 

कमलनाथ की नियत पर सवाल क्यों 

अब बात करते हैं कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ की नियत पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है। 
सोनिया गांधी ने दिनांक 4 मई 2020 को सार्वजनिक घोषणा करके मजदूरों का किराया अदा करने का वचन दिया था। 
प्रदेश अध्यक्ष श्री कमलनाथ को दिनांक 4 मई को ही एक्टिव हो जाना चाहिए था। 
सोनिया गांधी ने मजदूरों का किराया अदा करने का ऐलान किया है, कमलनाथ वापस बुलाने की व्यवस्था करने के लिए जानकारी मांग रहे हैं। दोनों बातें अलग-अलग हैं। 
सड़क मार्ग से यात्री परिवहन बंद है। मजदूरों को स्पेशल ट्रेन से लाया जा रहा है। मामला भारतीय रेल का है जो मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित नहीं होती जबकि प्रदेश अध्यक्ष श्री कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से जानकारी मांग रहे हैं। 
यह पत्र बिल्कुल वैसा ही है जैसे कि भारतीय जनता पार्टी के ताजा-ताजा बड़े नेता बने ज्योतिरादित्य सिंधिया ने घोषणा की थी कि मैं सरकार के राहत कोष में ₹3000000 अदा करने के लिए तत्पर हूं। हमारे पास पुख्ता जानकारी नहीं है कि यह रकम ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब तक सरकारी खजाने में जमा कराई या फिर नहीं। 

तो क्या करना चाहिए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को 

प्रदेश अध्यक्ष श्री कमलनाथ को चाहिए था कि दिनांक 4 मई 2020 को तत्काल मध्यप्रदेश में पदस्थ भारतीय रेल के सभी डीआरएम से संपर्क करके सुनिश्चित करते कि उन्हें आने वाली सभी श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की जानकारी दी जाए। 
कांग्रेस पार्टी की टीम रेलवे स्टेशन पर तैनात कर दी जाती। आने वाले मजदूरों से उनका टिकट प्राप्त करते और उसके बदले टिकट में दर्ज किराया अदा कर देते। 
यही सबसे उचित और सरल प्रक्रिया थी जो तत्काल की जा सकती थी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रक्रिया को कठिन और सरकारी जाल में उलझाने की कोशिश की। 
क्यों ना यह मान लिया जाए कि कमलनाथ मजदूरों की मदद नहीं करना चाहते। 
यदि कमलनाथ अभी भी सच में मजदूरों को किराया अदा करना चाहते हैं तो सिर्फ इतनी सी घोषणा कर दें कि जिस व्यक्ति के पास स्पेशल ट्रेन का टिकट है वह व्यक्ति कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष के पास अपना टिकट जमा करा कर नगद पैसे प्राप्त कर ले। 
इसका सीधा फायदा मजदूरों को होगा। यदि सरकार ने उनका किराया माफ नहीं किया तो उन्हें कांग्रेस पार्टी से मिल जाएगा और यदि सरकार ने किराया माफ कर दिया है तो किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं होगी।

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