नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 : सरकारी कर्मचारियों के बीच वरिष्ठता को लेकर अक्सर विवाद हो जाता है। कई बार मामला हाई कोर्ट तक पहुंचता है और वहीं पर डिसाइड होता है लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की सीनियरिटी का फॉर्मूला ही फिक्स कर दिया है। इसके कारण भारत में लाखों विवाद हाई कोर्ट तक नहीं पहुंचेंगे, बल्कि ऑफिस लेवल पर ही सॉल्व हो जाएंगे। इस न्यूज़ में आपको सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत हुए मामले की पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट का फैसला विस्तार से पढ़ने को मिल जाएगा।
मामले की पूरी कहानी
भर्ती प्रक्रिया (2000-2001): तमिलनाडु बिजली बोर्ड ने सहायक इंजीनियरों (AE) के पदों पर भर्ती शुरू की। दिसंबर 2000 में सीधी भर्ती के माध्यम से 200 और मार्च 2001 में 100 और इंजीनियरों की नियुक्ति की गई।
प्रशिक्षण की शर्तें: उस समय बोर्ड की कार्यवाही (BP No. 35) के अनुसार, इन प्रशिक्षुओं को 2 साल का प्रशिक्षण लेना था और उन्हें 7,500 रुपये प्रति माह का समेकित वेतन दिया जाना था। इसके पूरा होने पर उन्हें नियमित वेतनमान और परिवीक्षा (Probation) पर रखा जाना था।
आंतरिक चयन में देरी: बोर्ड ने आंतरिक उम्मीदवारों के लिए भी लिखित परीक्षा का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी और स्थगन आदेश (Stay) प्राप्त कर लिया। इस कारण आंतरिक उम्मीदवारों की पदोन्नति/चयन में देरी हुई और वे अंततः मई 2002 में नियुक्त हो सके।
प्रशिक्षण अवधि में कमी (2002): अप्रैल 2002 में, बोर्ड ने सीधी भर्ती वाले प्रशिक्षुओं के प्रतिनिधित्व पर विचार करते हुए उनकी प्रशिक्षण अवधि को 2 साल से घटाकर 3 महीने कर दिया (BP No. 9)।
टंटे की जड़
आंतरिक रूप से चुने गए उम्मीदवारों ने इसे अदालत में चुनौती दी। उनका तर्क था कि प्रशिक्षण अवधि को वरिष्ठता के लिए नहीं गिना जाना चाहिए और सीधी भर्ती वालों की वरिष्ठता केवल तभी से शुरू होनी चाहिए जब उनकी 2 साल की प्रारंभिक शर्त पूरी होती या जब उनकी परिवीक्षा (Probation) शुरू हुई।
मामला हाई कोर्ट में डिसाइड नहीं हो पाया
Tamil Nadu High Court Single Bench : एकल न्यायाधीश ने आंतरिक उम्मीदवारों की याचिकाओं को खारिज कर दिया और फैसला सुनाया कि सीधी भर्ती वाले AE अपनी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता के हकदार हैं। इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की गई।
Tamil Nadu High Court Division Bench: खंडपीठ ने इस फैसले को उलट दिया। उन्होंने आदेश दिया कि वरिष्ठता सूची फिर से तैयार की जाए और माना कि सीधी भर्ती वालों की वरिष्ठता केवल 23 अप्रैल 2002 (BP No. 9 जारी होने की तारीख) से शुरू मानी जानी चाहिए, क्योंकि उससे पहले वे केवल 'प्रशिक्षु' थे। लेकिन यह फैसला भी दोनों पक्षों को स्वीकार नहीं था। इसलिए मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और तर्क
सुप्रीम कोर्ट ने खंडपीठ के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया और निम्नलिखित महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
नियमों की व्याख्या (Regulation 10(9) और 87): न्यायालय ने सेवा नियमों (Regulations) का हवाला देते हुए कहा कि 'ड्यूटी' की परिभाषा में प्रशिक्षण की अवधि स्पष्ट रूप से शामिल है।
नियम 87 के अनुसार, किसी व्यक्ति को उस समय सेवा में नियुक्त माना जाता है जब वह पहली बार पद के कर्तव्यों का निर्वहन करता है या प्रशिक्षण शुरू करता है।
वरिष्ठता का आधार (Regulation 97): वरिष्ठता चयन के समय तैयार की गई योग्यता सूची (Merit List) में रैंक द्वारा निर्धारित होती है।
परिवीक्षा (Probation) शुरू होने की तारीख का वरिष्ठता के निर्धारण से कोई लेना-देना नहीं है।
कैलेंडर वर्ष का नियम: नियमों के अनुसार, आंतरिक और सीधी भर्ती के बीच 1:1 का अनुपात तब लागू होता है जब दोनों एक ही कैलेंडर वर्ष में नियुक्त हों। इस मामले में, सीधी भर्ती 2000-2001 में हुई थी, जबकि आंतरिक चयन 2002 में हुआ था, इसलिए वे वरिष्ठता में सीधी भर्ती वालों से ऊपर होने का दावा नहीं कर सकते।
प्रशिक्षण अवधि कम करने का प्रभाव: न्यायालय ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि कम करना नियोक्ता (Employer) का विशेषाधिकार है। इससे उन उम्मीदवारों की सेवा अवधि नहीं मिट जाती जो पहले से ही ड्यूटी (प्रशिक्षण) पर थे।
Supreme Court Fixes Seniority Formula for Government Employees, Clear Rule Issued
अंतिम निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट ने सीधी भर्ती वाले सहायक इंजीनियरों की वरिष्ठता को उनकी Joining की पहली तारीख से बरकरार रखा और खंडपीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें प्रशिक्षण अवधि को वरिष्ठता से बाहर रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च, 2026 को दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की अवधि को 'ड्यूटी' माना जाना चाहिए और वरिष्ठता कार्यभार ग्रहण करने की पहली तारीख से गिनी जानी चाहिए।

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